पहाड़ में बारिश और तबाही से बनी कृत्रिम झील, देहरादून-टिहरी पर मंडराया खतरा!
Sep 2 2018 12:40PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड में इस वक्त बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचाई हुई है। आसमानी आफत से कोई भी जिला नहीं छूटा। इस बीच एक हैरान कर देने वाली खबर निकलकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से टिहरी गढ़वाल और देहरादून की सीमा पर एक कृत्रिम झील बन गई है। उत्तराखंड के टिहरी जिले और देहरादून की सीमा पर बसे लवारका गांव के लोगों की नींद उड़ी हुई है। गांव के दूसरे छोर से पूरा पहाड़ नदी पर आ गया और इसने नदी को रोक दिया है। नदी ने यहां एक विशालकाय झील का रूप ले लिया है। पानी जमा होने से इस झील के दूसरे छोर पर बसा गांव खतरे में है. खतरा ये भी है कि इस पानी की वजह से गांव की जमीन का कटान होने लगा है। अगर बारिश बढ़ी तो इस झील के टूटने का खतरा है।
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खतरा ये भी है कि अगर झील टूटी को इसकी जद में निचले इलाके के कई गांव आएंगे। ये झील एक बड़े पहाड़ के टूटने से बनी है। खतरा ये भी है कि ठीक सामने वाला विशालकाय पहाड़ किसी भी वक्त टूट कर उसी झील में समा सकता है। इस वजह से इसके बाद होने वाली तबाही की कल्पना भी नहीं की जा सकती। तेज बारिश के बाद टिहरी गढ़वाल के लवारका गांव में जबरदस्त भूस्खलन हुआ। टिहरी से देहरादून के बांदल गांव में आकर मिलने वाली नदी का मुख पूरी तरह से बंद हो गया है। इस वजह से ये बेहद बड़ी झील बन गई। 80 मीटर गहरी और करीब 110 मीटर लंबी इस झील ने लोगों के साथ साथ प्रशासन में भी हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय लोगों में इस झील को लेकर रह-रहकर खौफ पैदा हो रहा है।
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बताया जा रहा है कि इस झील में लगातार पानी बढ़ रहा है और इस वजह से आसपास के क्षेत्रों के लिए भारी खतरा पैदा हो गया है। नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक स्थानीय लोगों ने कहा है कि इस झील से पानी छूटा तो वो अपना सब कुछ गंवा देंगे। लोगों को झील के आसपास ना जाने के निर्देश दिए गए हैं।इससे पहले टिहरी जिलेे के कोट गांव में बादल फट गया। इस भीषण तबाही में एक परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। उधर बागेश्वर में तो हाहाकार ही मचा है। कपकोट गांव में बादल फटने से सरयू नदी उफान पर है। बादल फटने की वजह से सड़कों पर भारी भूस्खलन हो रहा है। अकेले बागेश्वर जिले में एक दर्जन से ज्यादा मार्ग बंद हो गए हैं। उत्तराखंड में विभिन्न मार्गों पर भूगर्भीय दृष्टि से 43 बेहद संवेदनशील भूस्खलन जोन लोक चिह्नित किए गए हैं।