उत्तराखंड की बेटी ने सीएम से लगाई गुहार..‘न्याय नहीं मिला तो खुद को आग लगा दूंगी’
Sep 6 2018 11:22AM, Writer:कपिल
‘10 सिंतबर तक न्याय नहीं मिला तो मैं आत्मदाह कर लूंगी’..ये कहानी उत्तराखंड में लाचार पड़े खाकी सिस्टम, एक बेबस बेटी और दहेज के खूंखार राक्षसों से जुड़ी है। पढ़िए और शेयर कीजिए ताकि इस बेटी को न्याय मिले। उत्तराखंड की एक महिला ने ससुराल वालों से परेशान होकर उत्तराखंड के सीएम से गुहार लगाई है। महिला ने सुनवाई पूरी ना होने पर आत्मदाह की धमकी दे डाली है। दहेज के दानवों ने उस बेटी को ऐसे तड़पाया है कि वो ससुराल छोड़कर अपने मायके में रहने के लिए मजबूर है। आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि महिला ने ससुराल वालों पर गर्भपात करवाने का भी आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि दहेज के राक्षसों ने उफसे जबरन दवाई खिलाई और गर्भपात करवाया। महिला का आरोप है कि पुलिस से उसने कई बार शिकायत भी की, लेकिन अब तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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महिला अब परेशान हो चुकी है। उसने 10 सितंबर को आत्मदाह की धमकी दे दी है। अल्मोड़ा जिले की वो बेटी फिलहाल लालडांठ रोड हल्द्वानी में रह रही है। महिला का कहना है कि वो बेहद गरीब घर से है। 24 जनवरी को उसकी शादी रेलवे कालोनी काठगोदाम के रहने वाले आकाश कुमार से घोड़ाखाल मंदिर में हुई। शादी के दो दिन बाद ही आकाश उसे लेकर किराये के कमरे में रहने लगा। महिला का आरोप है कि इसके बाद आकाश की मां और बुआ कमरे में आकर उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। 16 अप्रैल का दिन उस महिला के लिए किसी नारकीय दर्द से कम नहीं था। आरोप है कि ससुरालियों ने दवाइयां खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया। इसके दो दिन बाद ही यानी 18 अप्रैल को उस महिला को पी-पीटटकर घर से निकाल दिया गया। इसके बाद से वो मायके में रहने लगी।
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इसके बाद महिला ने आरोप लगाया है कि 3 मई को उसे और उसकी मां को डरा धमकाकर तहसील में बुलाया गया और कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। महिला ने पति पर फर्जी फेसबुक आइडी बनाने का भी आरोप लगाया है। इसके बाद भी कई संगीन आरोप हैं। जब इतना सब कुछ हो गया तो 24 मई को वो महिला वकील से मिलने नैनीताल गई थी। वहां से उसका पति उसे डरा-धमकाकर अपने साथ ले गया और उससे जबरन दुष्कर्म किया। महिला ने 30 अगस्त को समाधान पोर्टल पर शिकायती पत्र भेजा और कहा है कि 10 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो 10 सितंबर को आत्मदाह कर दूंगी। ज़ीरो टॉलरेंस की बात कहने वाले उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से हमारी अपील है कि सबसे पहले इस महिला का दर्द सुनिए। अब वास्तव में एक कड़ा फैसला लेने का वक्त आ गया है। अपने मजबूत इरादों को दिखाइए। एक बेटी को बचाइए।