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रुद्रप्रयाग: वीर-भड़ों की थाती रहा ल्वेगढ़ पड़ा वीरान, बूढ़ी मां के शव को नहीं मिले चार कांधे

गढ़वाल के 52 गढ़ों में से एक ल्वेगढ़ में एक 90 वर्षीय वृद्धा सीता देवी का निधन हो गया। पलायन के कारण उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए गांव में कोई पुरुष मौजूद नहीं था।
Oct 13 2025 12:11PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

वीर-भड़ों की थाती रहा ल्वेगढ़ गांव आज पलायन की दर्दनाक तस्वीर बन गया है। इस गांव का जिक्र आपने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों में सुना होगा, कभी यहां लोगों की चहल-पहल हुआ करती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि एक वृद्ध औरत की मौत होने पर शव उठाने के लिए चार कंधे भी जुटाना मुश्किल हो गया है। उनके शव को घाट तक पहुंचाने के लिए अगले दिन पड़ोसी गांव के लोग पहुंचे, तब जाकर अंतिम संस्कार हो पाया।

Four shoulders were not found for funeral due to migration

जानकारी के अनुसार रुद्रप्रयाग ज़िले के कांडई क्षेत्र में स्थित ल्वेगढ़ गांव में एक 90 वर्षीय वृद्धा सीता देवी का निधन हो गया। पलायन के कारण उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए गांव में कोई पुरुष मौजूद नहीं था। मृतक सीता देवी का बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है, और गांव में अब सिर्फ तीन महिलाएं और एक पुरुष ही बचे हैं। ऐसे में वृद्धा के शव को मृत्यु होने के दिन घाट तक नहीं ले जाया जा सका। जब अगले दिन जब ल्वेगढ़ गांव के पड़ोसी गांवों कलेथ, पांढरा मड़गांव, मलछोड़ा आदि केलोगों को इस घटना की जानकारी मिली, तो वे ल्वेगढ़ गांव पहुंचे। उनकी मदद से दूसरे दिन सीता देवी का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

जीवन की बुनियादी सुविधाओं का अभाव

ल्वेगढ़ गांव में कभी 15–16 परिवार निवास करते थे, लेकिन पलायन के कारण आज ये गांव पूरा वीरान हो चुका है। कांडई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव में अब भी जीवन की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां न सड़क, न पेयजल, न स्वास्थ्य सुविधा और न ही शिक्षा की उचित व्यवस्था है, ऐसे में यहां कई सालों से पलायन लगातार जारी है। ल्वेगढ़ गांव का रास्ता बेहद ख़राब और खतरनाक है। गांव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को पढ़ने के लिए 2 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों तक पैदल जाना पड़ता है और आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं है। उत्तराखंड में ल्वेगढ़ गांव के अलावा और भी कई ऐसे गांव हैं जो पलायन, उपेक्षा और संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं। कभी जीवन से भरे इन गांवों की खामोशी अब पहाड़ की एक गहरी सामाजिक पीड़ा बन चुकी है।

मरछोला तक सड़क स्वीकृत

रुद्रप्रयाग विधानसभा के विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि ल्वेगढ़ गांव की समस्या संज्ञान में ली गई है। इस गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जिला योजना सहित अन्य मदों में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। “मरछोला तक सड़क स्वीकृत हो चुकी है और जल्द इसका निर्माण शुरू होगा। इससे ल्वेगढ़ की पैदल दूरी काफी कम हो जाएगी। गांव को सड़क से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे,”। ग्राम प्रधान संजय पांडे ने बताया कि उनका कार्यकाल अभी शुरू हुआ है और प्राथमिकता के आधार पर गांव की सड़कों को सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की गई है और जल्द ही स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।


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