ऋषिकेश पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, परमार्थ निकेतन में सामूहिक विवाह महोत्सव का दिया निमंत्रण
आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पहुंचे, जहां संतों ने वेदमंत्रों के साथ गंगा पूजन किया। आचार्य शास्त्री ने सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का पावन निमंत्रण भी दिया।
Jan 22 2026 7:16PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज उत्तराखंड के आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध परमार्थ निकेतन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। परमार्थ निकेतन पहुंचते ही वातावरण पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। उनके आगमन की सूचना मिलते ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं और साधकों के बीच उत्साह देखने को मिला।
Dhirendra Shastri arrived at Parmarth Niketan in Rishikesh
परमार्थ निकेतन में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से मुलाकात की। इस भेंट के दौरान दोनों संतों के बीच आध्यात्मिक विषयों पर संवाद हुआ और सनातन संस्कृति, समाज सेवा तथा जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस मुलाकात को धार्मिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला संदेश माना जा रहा है।
श्रीराम लला प्रतिष्ठा-2026
1
/
इस अवसर पर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रीराम लला प्रतिष्ठा-2026 को लेकर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर देश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है, जो समाज में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा। उनकी शुभकामनाओं के बाद आश्रम परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का निमंत्रण
2
/
आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती को आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का पावन निमंत्रण भी दिया। यह महोत्सव सामाजिक सहयोग और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। माना जा रहा है कि इस आयोजन से समाज में सहयोग, सेवा और समरसता का संदेश जाएगा और गरीब व जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
वेदमंत्रों के साथ हुआ गंगा पूजन
3
/
भेंट के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती और आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ विधिवत गंगा पूजन भी किया। गंगा आरती और पूजन के समय परमार्थ निकेतन का वातावरण भक्तिमय हो गया। यह पूजा आध्यात्मिक शांति, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण की भावना के साथ संपन्न हुई।
आध्यात्मिक संदेश: सेवा, संस्कृति और समरसता
4
/
परमार्थ निकेतन में यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर रहा जिसने सनातन संस्कृति, सामाजिक सेवा, और धार्मिक समरसता का संदेश दिया। दोनों संतों की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी आध्यात्मिकता का अहम हिस्सा है।