image: Questions Raised Over Outsider Recruitment in Uttarakhand Disaster Management

उत्तराखंड में बाहरी नियुक्तियों पर फिर सवाल, आपदा विभाग में ₹2.5 लाख महीना की नौकरी से मचा बवाल

उत्तराखंड आपदा विभाग में ₹2.5 लाख महीना वाले “एक्सपर्ट” पद पर बाहरी नियुक्ति के आरोप से विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय युवाओं ने विज्ञप्ति से छेड़छाड़ और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग की है।
Jan 30 2026 11:37AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार में एक बार फिर बाहरी नियुक्तियों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। ताज़ा मामला उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर ₹2,50,000 प्रति माह वेतन वाले “एक्सपर्ट” पद पर बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति का आरोप सामने आया है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि विज्ञप्ति से छेड़छाड़ कर सहारनपुर और हरियाणा के लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि उत्तराखंड के योग्य युवाओं को नजरअंदाज किया गया।

Questions Raised Over Outsider Recruitment in Uttarakhand Disaster Management

आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया की विज्ञप्ति में शर्तों में हेरफेर कर ऐसे मानदंड जोड़े/हटाए गए, जिससे बाहरी अभ्यर्थियों को बढ़त मिल सके। स्थानीय संगठनों का दावा है कि यदि चयन प्रक्रिया मूल शर्तों के साथ होती, तो राज्य के प्रशिक्षित और अनुभवी उम्मीदवार भी प्रतिस्पर्धा में होते। यह पहला मौका नहीं है जब बाहरी नियुक्तियों पर सवाल उठे हों। इससे पहले डाकिया, जूनियर इंजीनियर (JE) जैसी भर्तियों में भी बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को तरजीह मिलने के आरोप लगते रहे हैं। अब आपदा विभाग के “एक्सपर्ट” पद पर बाहरी की नियुक्ति ने बहस को और तेज कर दिया है।

आपदा राज्य में स्थानीय अनुभव की अनदेखी?

उत्तराखंड आपदा-संवेदनशील राज्य है—भूस्खलन, बादल फटना, हिमस्खलन, बाढ़ जैसी चुनौतियां यहां की भौगोलिक हकीकत हैं। स्थानीय युवाओं का तर्क है कि स्थानीय भूगोल, समुदाय और जोखिम प्रोफाइल को समझने वाला विशेषज्ञ ही बेहतर रणनीति बना सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राज्य के युवा एक्सपर्ट नहीं बन सकते?

योग्यता बनाम अवसर: युवाओं का आक्रोश

राज्य के इंजीनियरिंग, भू-विज्ञान, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण विज्ञान से प्रशिक्षित युवा पूछ रहे हैं— “अगर यहां अवसर नहीं, तो क्या हमें दिल्ली–मुंबई जाकर बर्तन मांजने पड़ेंगे?”
उनका कहना है कि उच्च वेतन वाले पदों पर स्थानीय प्रतिभा को मौका देना चाहिए, ताकि राज्य में ब्रेन ड्रेन न हो।

सरकार से मांग: जवाबदेही और पारदर्शिता

युवा संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:
भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो
विज्ञप्ति में हुए कथित बदलावों का सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाए
स्थानीय आरक्षण/प्राथमिकता नीति को स्पष्ट किया जाए
भविष्य की नियुक्तियों में खुले, निष्पक्ष और पारदर्शी मानदंड अपनाए जाएं

नीति बनाम अमल: सरकार की कसौटी

सरकार अक्सर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और रोज़गार सृजन की बात करती है। ऐसे में इस तरह की नियुक्तियां नीति और अमल के बीच अंतर को उजागर करती हैं। यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल न्याय बल्कि विश्वास का भी प्रश्न है।
उत्तराखंड के युवाओं की अपेक्षा साफ है—राज्य के संसाधन और पद पहले राज्य के लिए। आपदा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थानीय विशेषज्ञता को दरकिनार करना नीतिगत भूल साबित हो सकती है। अब निगाहें सरकार और आपदा विभाग के जवाब पर टिकी हैं।


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