ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना में बड़ी कामयाबी, 10 km की सुरंग आर-पार.. 28 में से 22 का निर्माण पूरा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की पहली करीब 10 किलोमीटर लंबी सुरंग की निकास सुरंग शुक्रवार को आर-पार हो जाएगी, जबकि मुख्य सुरंग का काम जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य है।
Sep 11 2026 6:18PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है। परियोजना की पहली सुरंग की निकास सुरंग शुक्रवार को आर-पार यानी ब्रेकथ्रू होने जा रही है। वहीं मुख्य सुरंग का बचा हुआ करीब डेढ़ किलोमीटर काम जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ढालवाला से नीर गड्डू तक बन रही यह सुरंग करीब 10 किलोमीटर लंबी है और परियोजना के सबसे संवेदनशील हिस्सों में शामिल है।
Rishikesh-Karnaprayag Rail Project’s First Tunnel to Break Through
ऋषिकेश के पास ढालवाला से शुरू होने वाली यह सुरंग भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में बनाई जा रही है। यहां बड़ी भूगर्भीय दरार होने के कारण निर्माण के दौरान इंजीनियरों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। इसी वजह से परियोजना की पहली सुरंग को आर-पार करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा। अब निकास सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है और शुक्रवार शाम करीब 3 बजे इसका ब्रेकथ्रू किया जाएगा। मुख्य सुरंग का करीब 1.5 किलोमीटर हिस्सा अभी बाकी है, जिसे जनवरी तक पूरा करने की तैयारी है।
125 किलोमीटर लंबी परियोजना में 28 सुरंगें
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है। इसमें कुल 28 सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से 22 सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। परियोजना में मुख्य सुरंगों के साथ निकास सुरंगें भी बनाई जा रही हैं, जिससे रेल संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
सुरंग के अंदर भी शुरू हुआ ट्रैक बिछाने का काम
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना में अब सुरंगों के अंदर ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है। इसी साल मई से शिवपुरी और गूलर के बीच ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया गया था। अब तक करीब 1.5 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जा चुका है। इस हिस्से में कुल छह किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाना है।
दो चरणों में कर्णप्रयाग पहुंचेगी ट्रेन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत ट्रेन संचालन को दो चरणों में शुरू करने की तैयारी है।
पहला चरण: योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से ब्यासी स्टेशन के बीच जून 2028 तक ट्रेन संचालन का लक्ष्य है। दोनों स्टेशनों के बीच करीब 27 किलोमीटर की दूरी है।
दूसरा चरण: ब्यासी से कर्णप्रयाग तक ट्रेन पहुंचाने का लक्ष्य दिसंबर 2029 रखा गया है। इस हिस्से की लंबाई करीब 92 किलोमीटर है।
OHE और इलेक्ट्रिकल काम भी होंगे तेज
परियोजना में इलेक्ट्रिकल से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम भी किए जाने हैं। पहले चरण में ब्यासी तक जनरल पावर सप्लाई, फायर टेंडर और सुरंगों में वेंटिलेशन जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा।आगे पढ़िए..
इन कार्यों पर करीब 434 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा रेल लाइन पर ओवरहेड इक्यूपमेंट (OHE) लगाने का काम भी दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में श्रीनगर तक OHE का काम करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इसके बाद कर्णप्रयाग तक भी लगभग इतनी ही लागत से काम किया जाएगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर एक नजर
परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है।
कुल 12 नए रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
यात्री ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
मालगाड़ियों की अधिकतम गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
परियोजना में कुल 19 पुल बनाए जा रहे हैं।
परियोजना में कुल 28 सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।
इनमें से 22 सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है।
परियोजना की पहली सुरंग करीब 10 किलोमीटर लंबी है।
मुख्य सुरंग का करीब 1.5 किलोमीटर काम अभी बाकी है।
RVNL ने बताया जनवरी तक पूरा होगा मुख्य सुरंग का काम
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक सिविल ओपी मालगुड़ी के अनुसार, परियोजना की पहली टनल की निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू शुक्रवार को किया जाएगा। मुख्य सुरंग का करीब डेढ़ किलोमीटर काम अभी बचा है और इसे जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे चारधाम और अन्य पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।