रुद्रप्रयाग: केदारनाथ मार्ग पर शराब से भरे ट्रकों की कतार, पहाड़ में नए गोदाम बनाएगा आबकारी विभाग
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर तिलबाड़ा में शराब से भरे कई ट्रक खड़े किए गए हैं। आबकारी विभाग ने गोदाम में जगह की कमी बताया है, लेकिन स्थानीय लोग इसे गलत प्राथमिकताओं और सामाजिक दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। मामला विकास, व्यवस्था और नैतिकता पर बहस छेड़ रहा है
Feb 8 2026 4:26PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
केदारघाटी के द्वार तिलबाड़ा में इन दिनों एक अनोखी और चिंताजनक तस्वीर देखने को मिल रही है। तिलबाड़ा में केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर शराब से लदे कई ट्रक सड़क के दोनों ओर खड़े नजर आ रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ यातायात बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
Liquor Trucks Parked on Kedarnath Route in Rudraprayag
जानकारी के अनुसार, केदारनाथ धाम मार्ग पर तिलबाड़ा में कई शराब से भरे ट्रक लंबे समय से सड़क किनारे खड़े हैं। आबकारी अधिकारियों के मुताबिक गोदामों में जगह की कमी, अस्थायी भंडारण की समस्या और गोदाम फुल होने के चलते ट्रकों को फिलहाल सड़क पर रोका गया है। जल्द ही माल उतारकर वाहनों को हटाने का दावा किया गया है। आबकारी विभाग का कहना है कि यह स्थिति अस्थायी है। विभाग के अनुसार अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था की जा रही है और जल्द शराब को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। आगे देखिये विडियो...
आस्था के मार्ग पर शराब का दबाव?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति अप्रत्यक्ष रूप से पहाड़ी समाज पर दबाव बनाती है। लोगों का कहना है पहले से गोदाम भरे हैं और फिर भी नई शराब मंगाई जा रही है। ऐसा लगता है जैसे जल्दी खपत का दबाव बनाया जा रहा हो। खास बात यह है कि यह भंडारण सब्जी या अनाज का नहीं, बल्कि शराब का है।
केदार घाटी में जर्जर व्यवस्था पर सवाल
केदारनाथ यात्रा मार्ग धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां इस तरह की व्यवस्था कई सवाल खड़े करती है जैसे.. क्या प्रशासन की प्राथमिकता सही है? क्या यात्रा सीजन के नाम पर स्टॉक बढ़ाया जा रहा है? क्या भंडारण क्षमता का सही आकलन किया गया था? विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक क्षेत्रों में इस तरह की अव्यवस्था गलत संदेश देती है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मंगाने का औचित्य भी सवालों के घेरे में है।
प्रशासनिक "मंशा" पर उठे सवाल
1
/
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भंडारण की व्यवस्था पहले से नहीं थी, तो इतनी बड़ी खेप क्यों मंगाई गई? वैकल्पिक गोदाम पहले क्यों नहीं बनाए गए? यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।
व्यवस्था पर पुनर्विचार जरूरी
2
/
केदार घाटी जैसे पवित्र और संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह शराब से भरे ट्रकों का खड़ा होना केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक चिंता का विषय भी है। देखना दिलचस्प यह होगा कि अब प्रशासन क्या करता है.. कितने गोदाम नए बनाए जाते हैं। आप इस मामले पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।