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उत्तराखंड को मिलेगा पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, साक्षरता दर 98% के पार, सरकार की तैयारी पूरी.. कैबिनेट में रखा जाएगा प्रस्ताव

उत्तराखंड जल्द ही पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो सकता है। राज्य की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की घोषणा की है।
Jun 18 2026 11:11AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड जल्द ही देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल होने जा रहा है। राज्य की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक पहुंचने के बाद सरकार ने इसे पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस संबंध में आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसके बाद इसे केंद्र सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

Uttarakhand Set to Become India's Next Fully Literate State

राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखंड ने केंद्र सरकार के उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society - ULLAS) कार्यक्रम के तहत निर्धारित सभी साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।

साक्षरता अभियान ने बदली तस्वीर

उत्तराखंड में वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में विशेष अभियान चलाए गए। उल्लास कार्यक्रम के तहत बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार ने सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लेकर साक्षरता अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया। इस पहल का उद्देश्य उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाना था जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।

महिलाओं और वंचित वर्गों पर रहा विशेष फोकस

साक्षरता अभियान के दौरान महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य वंचित समूहों को प्राथमिकता दी गई। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अभियान चलाया गया जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। सरकार का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा से पूरे परिवार और समाज का विकास संभव होता है। इसी सोच के साथ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए गए। आगे पढ़िए..

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड ने साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब राज्य पूर्ण साक्षरता के निर्धारित मानकों को पार कर चुका है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि केंद्र सरकार से अंतिम स्वीकृति मिलती है तो उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन जाएगा। देश में अब तक पांच राज्य पूर्ण साक्षरता का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। इनमें मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। उत्तराखंड इस सूची में शामिल होने वाला अगला राज्य बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

क्या है केंद्र सरकार का उल्लास कार्यक्रम?

केंद्र सरकार द्वारा संचालित उल्लास (ULLAS) कार्यक्रम 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की शिक्षा पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वयस्कों को बुनियादी शिक्षा, जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल जागरूकता प्रदान करना है। सरकार के मानकों के अनुसार जब किसी राज्य में वयस्क साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उस राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा उत्तराखंड

पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा मिलने से उत्तराखंड की पहचान शिक्षा और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी के माध्यम से साक्षरता के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


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