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उत्तराखंड की ट्राउट फिश को मिली इंटरनेशनल पहचान, 33 मत्स्य पालकों को लाखों की आय.. उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश पहली बार नेपाल निर्यात की गई है। 5 मीट्रिक टन मछली के निर्यात से 33 मत्स्य पालकों को करीब 23.5 लाख रुपये की आय हुई। अब सरकार दुबई सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की तैयारी कर रही है।
Jun 26 2026 9:17PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही है। पहली बार राज्य से नेपाल को 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का निर्यात किया गया है, जिससे राज्य के मत्स्य पालकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। सरकार का लक्ष्य अब केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुबई समेत खाड़ी देशों और देश के बड़े महानगरों में भी उत्तराखंड की ट्राउट फिश को पहुंचाना है।

Uttarakhand Exports Trout Fish to Nepal for the First Time

23 जून को नेपाल के बाजार में 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश भेजी गई। इस निर्यात से 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.5 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
सरकारी अनुमान के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में करीब 30 मीट्रिक टन ट्राउट फिश नेपाल निर्यात किए जाने की संभावना है। राज्य सरकार दुबई के बाजार में भी ट्राउट फिश भेजने की तैयारी कर रही है। पिछले वर्ष गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ इस दिशा में सकारात्मक बातचीत हुई थी। हालांकि, अभी तक दुबई को निर्यात शुरू नहीं हो पाया है। इसके पीछे कई तकनीकी और व्यावसायिक कारण बताए जा रहे हैं।

क्यों नहीं हो पा रहा दुबई निर्यात?

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में तीन प्रमुख चुनौतियां सामने हैं—
राज्य में आधुनिक फिश प्रोसेसिंग प्लांट की कमी।
ट्राउट फिश का औसत वजन केवल 700 से 800 ग्राम होना।
निर्यात से जुड़ी आवश्यक तकनीकी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं का पूरा न होना।
गल्फ देशों की मांग है कि प्रत्येक ट्राउट फिश का वजन लगभग 3 किलोग्राम हो, जबकि उत्तराखंड में उत्पादित अधिकांश मछलियां इससे काफी छोटी हैं।

150 साल पुराना है ट्राउट फिश का इतिहास

उत्तराखंड में ट्राउट फिश पालन का इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है। वर्ष 1850 के दशक में अंग्रेज स्विट्जरलैंड से ट्राउट फिश का बीज हिमालयी क्षेत्रों में लेकर आए थे। तब से यह मछली उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की एक विशेष पहचान बन चुकी है और आज इसे राज्य की प्रीमियम फिश के रूप में जाना जाता है।

उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

राज्य में ट्राउट फिश उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
वर्ष 2020-21 में उत्पादन लगभग 250 मीट्रिक टन था।
वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन पहुंच गया।
यह उत्पादन प्रदेशभर में संचालित 1,625 रेसवेज के माध्यम से किया जा रहा है। आगे पढ़िए..

मत्स्य पालन से जुड़ रहे हजारों परिवार

मत्स्य पालन के क्षेत्र में लोगों की रुचि भी तेजी से बढ़ी है।
वर्ष 2021-22 में लगभग 10,011 परिवार मत्स्य पालन से जुड़े थे।
वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 15,657 परिवारों तक पहुंच गई।
इनमें 3,584 महिला मत्स्यपालक भी शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

सरकार बढ़ा रही है निवेश

मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अब तक 1,651 मत्स्य पालकों को लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कुल 11,805 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 165 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। मत्स्य विभाग का बजट भी लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2021-22 में जहां विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर 261.41 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

आईटीबीपी को भी हो चुकी है सप्लाई

राज्य से वर्ष 2024 से अब तक 45.10 टन ट्राउट फिश भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को भी सप्लाई की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.10 करोड़ रुपये बताई गई है।
मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, आने वाले महीनों में बड़े आकार की ट्राउट फिश तैयार करने, आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने और कोल्ड चेन नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही देश के बड़े शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्तराखंड की ट्राउट फिश की ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी तेज की जाएगी।


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