image: Accused sentenced to 20 years in child rape case

उत्तराखंड: शौचालय में 8 साल की मासूम के साथ किया था दुष्कर्म, अब 20 साल जेल में सड़ेगा दरिंदा

ऋषिकेश में आठ साल की बच्ची से यौन अपराध के मामले में विशेष POCSO कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पीड़िता को 3 लाख रुपये प्रतिकर देने का भी आदेश हुआ।
Aug 11 2026 12:22PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

ऋषिकेश में आठ साल की बच्ची से यौन अपराध के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे दो साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (पॉक्सो), देहरादून की अदालत ने सुनाया। खास बात यह है कि मामले में करीब एक साल के भीतर ही फैसला आ गया।

Accused sentenced to 20 years in child rape case

जानकारी के अनुसार यह मामला एक जुलाई 2025 का है। ऋषिकेश निवासी एक व्यक्ति ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी आठ वर्षीय बेटी लापता हो गई है। तलाश के दौरान चुंगी क्षेत्र स्थित शौचालय के पास से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। अंदर जाकर लोगों ने एक व्यक्ति को पाया। बच्ची ने बताया कि वह शौचालय गई थी, जहां पहले से मौजूद व्यक्ति ने उसके साथ गलत काम किया। इसके बाद लोगों ने आरोपी को पकड़कर बच्ची के पिता और पुलिस के हवाले कर दिया। 2 जुलाई 2025 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद 29 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई और 27 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए।

बच्ची की गवाही बनी अहम साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके पिता, स्कूल के प्रधानाचार्य/हेड टीचर, चिकित्सक, विवेचक और पुलिसकर्मी समेत अभियोजन पक्ष के छह गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आगे पढ़िए..

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता ने घटना के संबंध में बयान दिया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपी की पहचान भी की। अदालत ने बच्ची की जन्मतिथि से संबंधित स्कूल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों को भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। रिकॉर्ड के अनुसार बच्ची की जन्मतिथि 26 अप्रैल 2017 थी। घटना के दिन उसकी उम्र करीब आठ वर्ष थी, जिसके आधार पर अदालत ने उसे नाबालिग माना।

डीएनए मैच नहीं हुआ, फिर भी दोषी करार

मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। फोरेंसिक जांच के दौरान उसके कपड़ों से मिले डीएनए का आरोपी के डीएनए से भी मिलान नहीं हुआ। हालांकि, अदालत ने माना कि केवल डीएनए का मिलान नहीं होना आरोपी को दोषमुक्त करने का आधार नहीं है। अदालत ने पीड़िता की लगातार और सुसंगत गवाही समेत अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी मूल्यांकन किया।

BNS और POCSO की धाराओं में दोषी

अदालत ने आरोपी को BNS की धारा 137(2) के आरोप से बरी किया। हालांकि, उसे BNS की धारा 65(2) और POCSO अधिनियम की धारा 5(ड)/6 के तहत दोषी करार दिया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार के अनुसार, अदालत ने BNS की धारा 65(2) के तहत आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं POCSO अधिनियम की धारा 5(ड)/6 के तहत भी 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पीड़िता को 3 लाख रुपये प्रतिकर

अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का भी आदेश दिया है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में अदालत का त्वरित फैसला बाल यौन अपराधों से जुड़े मामलों में प्रभावी और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को भी रेखांकित करता है।


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