image: Gaula Bridge Safety Concerns After Heavy Rain in Haldwani

हल्द्वानी: पहली ही तेज बारिश नहीं झेल सके गौला पुल के चेक डैम, कुमाऊं की लाइफलाइन फिर खतरे में

हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित गौला पुल के नीचे बनाए गए चेक डैम के ब्लॉक पहली ही तेज बारिश में बहने लगे। गौला नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल की सुरक्षा और कटाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। एनएचएआई ने निरीक्षण कर जल्द मरम्मत का आश्वासन दिया है।
Jul 11 2026 12:14PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित काठगोदाम में गौला नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। पुल के पिलरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए चेक डैम के ब्लॉक पहली ही तेज बारिश में बहने लगे हैं। गौला नदी में जलस्तर बढ़ने से कटाव का खतरा भी बढ़ गया है। एनएचएआई ने मामले का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने की बात कही है।

Gaula Bridge Safety Concerns After Heavy Rain in Haldwani

मानसून की शुरुआती तेज बारिश ने काठगोदाम स्थित गौला पुल के नीचे पिलरों को सुरक्षित रखने के लिए लगाए गए चेक डैम के कंक्रीट ब्लॉक तेज बहाव के बीच बहने लगे। इससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है कि यदि शुरुआत में ही सुरक्षा ढांचा कमजोर पड़ने लगे तो पूरे मानसून के दौरान पुल पर खतरा बढ़ सकता है। दरअसल, बीते शुक्रवार की सुबह गौला नदी का जलस्तर 15,058 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि गुरुवार सुबह यह 12,408 क्यूसेक था। यानी महज एक दिन में जलस्तर में करीब 2,650 क्यूसेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि शाम तक जलस्तर घटकर 889 क्यूसेक पर पहुंच गया, लेकिन सुबह का तेज बहाव नदी की रफ्तार और कटाव की गंभीरता को दिखाने के लिए काफी था।

पुल की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के पिलरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए चेक डैम का उद्देश्य तेज बहाव से होने वाले कटाव को रोकना था। लेकिन यदि पहली ही तेज बारिश में इसके ब्लॉक बहने लगें, तो आने वाले महीनों में पुल की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग से तत्काल निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराने और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

2024 में भी हुआ था बड़ा नुकसान

गौरतलब है कि सितंबर 2024 में भी गौला पुल के किनारे बना सुरक्षा तटबंध (पुस्ता) नदी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पुल की सुरक्षा को लेकर लंबे समय तक चिंता बनी रही और मरम्मत कार्य पूरा करने में काफी समय लगा था। इसी वजह से इस बार शुरुआती बारिश में सामने आई स्थिति ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

कुमाऊं की लाइफलाइन है गौला पुल

गौला पुल कुमाऊं मंडल के सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में से एक है। यह पुल हल्द्वानी, गौलापार, सितारगंज, टनकपुर, पीलीभीत और पर्वतीय जिलों के बीच आवागमन का प्रमुख माध्यम है। बरसात के मौसम में यदि पुल की सुरक्षा प्रभावित होती है तो इसका असर हजारों यात्रियों, व्यापारिक गतिविधियों और आवश्यक सेवाओं पर पड़ सकता है।

एनएचएआई ने निरीक्षण का दिया भरोसा

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अचल जिंदल ने कहा कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान जो भी तकनीकी कमियां सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा ताकि पुल पूरी तरह सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान गौला नदी के जलस्तर और कटाव पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है। साथ ही पुल के आसपास बनी सुरक्षा संरचनाओं का समय-समय पर निरीक्षण और मजबूतीकरण किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके।


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