उत्तराखंड सरकार के सामने राजस्व का बड़ा सवाल, आधी भी नहीं हुई कमाई.. जानिए क्या रहा कारण
उत्तराखंड में ₹67,526 करोड़ के राजस्व लक्ष्य के मुकाबले अब तक 26% वसूली, खनन और ऊर्जा विभाग की रफ्तार सबसे बड़ी चिंता। स्टाम्प-रजिस्ट्रेशन में 37% वसूली, जबकि खनन 18% और ऊर्जा के करेत्तर राजस्व में सिर्फ 7% प्राप्ति हुई।
Sep 17 2026 7:17PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में विभागवार वसूली की समीक्षा कर रही है। मौजूदा आंकड़ों में खनन और ऊर्जा विभाग लक्ष्य के मुकाबले कम राजस्व जुटा पाए हैं, जबकि स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वसूली अपेक्षाकृत अधिक रही है। सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए नए स्रोत तलाशने और विभागों के बीच डेटा साझा करने पर भी जोर दिया है।
Uttarakhand Revenue Collection Falls Short of 2026-27 Targets
वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड सरकार ने कुल ₹67,526 करोड़ राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले अब तक ₹17,743 करोड़, यानी करीब 26 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं राज्य के अपने राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹25,219 करोड़ है। इसके मुकाबले ₹8,299 करोड़ यानी 32 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।
उत्तराखंड के प्रमुख विभागों की राजस्व वसूली
वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिए गए आंकड़ों के अनुसार लक्ष्य के मुकाबले प्राप्त राजस्व का प्रतिशत।
स्टाम्प-रजिस्ट्रेशन विभाग सबसे आगे
विभागवार आंकड़ों में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग 37 प्रतिशत वसूली के साथ आगे रहा। विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹3,092 करोड़ है, जिसके मुकाबले ₹1,143 करोड़ की प्राप्ति हुई है। समीक्षा में बताया गया कि कुल रजिस्टर्ड दस्तावेजों की संख्या में करीब 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बावजूद सर्किल दरों में संशोधन के बाद राजस्व संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई। राजस्व बढ़ाने के लिए स्टाम्प अधिनियम की विभिन्न धाराओं की समीक्षा और अगले तीन से पांच महीनों में वर्चुअल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। समान नागरिक संहिता पोर्टल और सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के बीच डेटा समन्वय स्थापित कर वसीयत पंजीकरण को आसान बनाने की भी तैयारी है।
GST में 31% वसूली, AI से तलाशेंगे टैक्स का Untapped Potential
राज्य कर विभाग के लिए SGST का सालाना लक्ष्य ₹12,200 करोड़ है। 31 जुलाई तक इसके मुकाबले ₹3,830 करोड़ यानी 31 प्रतिशत की प्राप्ति हुई। नॉन-GST यानी VAT में ₹2,652 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1,020 करोड़ यानी 38 प्रतिशत राजस्व मिला है।
राजस्व बढ़ाने के लिए विभाग को Untapped Potential पर काम करने को कहा गया है। इसके लिए AI आधारित इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर विकसित करने की योजना है। इसमें उद्योगों की बिजली खपत, रियल एस्टेट से जुड़े कर और इनकम टैक्स जैसे डेटा को फ्लैग कर संभावित टैक्स गैप की पहचान की जा सकेगी।
इस सिस्टम को अगले 5 से 6 महीनों में विकसित करने और बाद में CGST प्रणाली के अनुरूप API से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। माइनिंग ट्रांसपोर्ट, IFMS, आवास और पर्यटन सहित अन्य विभागों के डेटा को भी इससे जोड़ने की योजना है।
आबकारी विभाग: 30% वसूली, ₹355 करोड़ पुराना बकाया
आबकारी विभाग का सालाना लक्ष्य ₹5,384 करोड़ है। इसके मुकाबले ₹1,623 करोड़ यानी 30 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है। करीब 98 प्रतिशत आबकारी दुकानों का नवीनीकरण भी पूरा हो चुका है। हालांकि वर्ष 2016-17 से करीब ₹355 करोड़ का पुराना बकाया अभी भी वसूली के लिए लंबित है। मुख्य सचिव ने इस राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी ब्रांडों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रदेश में उत्पादित फलों से वाइनरी स्थापित करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
परिवहन विभाग में 31% राजस्व प्राप्त
परिवहन विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹1,703 करोड़ है। इसके मुकाबले ₹530 करोड़ यानी 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही सब्सिडी के कारण करीब ₹74 करोड़ की राजस्व हानि हो रही है। इसे देखते हुए लग्जरी वाहनों पर सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने या समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। वहीं बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से शत-प्रतिशत ग्रीन सेस वसूलने के लिए सभी एंट्री प्वाइंट को ANPR कैमरों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। आगे पढ़िए..
खनन विभाग सबसे पीछे, सिर्फ 18% राजस्व वसूली
राजस्व वसूली के लिहाज से खनन विभाग प्रमुख विभागों में सबसे कम प्रतिशत पर रहा। विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹1,500 करोड़ है, लेकिन जुलाई अंत तक केवल ₹267 करोड़ यानी 18 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ। खनन रॉयल्टी दरों में लंबे समय से संशोधन नहीं हुआ था और अब दरें बढ़ाई गई हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे आगे राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।
मुख्य सचिव ने वन और गैर-वन क्षेत्रों में नए खनन लॉट चिन्हित करने में जिला प्रशासन को सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। चंद्रभागा खनन लीज से जुड़े प्रत्यावेदन को न्यायालय के आदेश के अनुसार 15 दिन में निस्तारित करने और केंद्र के SASCI के तहत प्रस्तावित माइनिंग सेक्टर रिफॉर्म को जल्द लागू करने को भी कहा गया है।
ऊर्जा विभाग में करेत्तर राजस्व सबसे बड़ी चुनौती
ऊर्जा विभाग में कर राजस्व का लक्ष्य ₹550 करोड़ है, जिसके मुकाबले ₹122 करोड़ यानी 22 प्रतिशत प्राप्त हुआ है। वहीं करेत्तर राजस्व का लक्ष्य भी ₹550 करोड़ है, लेकिन इसमें केवल ₹40 करोड़ यानी 7 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद CPSES और निजी डेवलपर्स द्वारा वाटर टैक्स देना बंद किए जाने से राजस्व प्रभावित होने की बात सामने आई है। इसकी भरपाई के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। साथ ही जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग में नए राजस्व स्रोत तलाशने पर जोर
वन विभाग के लिए ₹752 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में लीसा निष्कर्षण से जुड़े राजस्व और लागत पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि इससे मिलने वाले राजस्व की तुलना में श्रम और परिचालन लागत अधिक है। ऐसे में अधिक राजस्व की संभावना तलाशने के लिए नवाचार आधारित पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
चार खनन लॉट पोर्टल पर दर्ज
गंगा समेत अन्य नदियों के चार खनन लॉट के नवीनीकरण प्रस्ताव परिवेश पोर्टल पर दर्ज किए जा चुके हैं। गोला, नंधौर और दाबका में खनन के नवीनीकरण और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े काम के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है। वन निगम को समय पर लॉट उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि उनसे राजस्व प्राप्त किया जा सके।
क्या बोले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी?
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के मुताबिक राज्य सरकार का प्रयास प्रदेश के राजस्व को बढ़ाना है। उनके अनुसार खनन और आबकारी जैसे विभागों में नए लक्ष्य तय किए जा रहे हैं और राजस्व बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर भी काम जारी है।
वरिष्ठ पत्रकार ने पर्यटन से राजस्व बढ़ाने की ओर दिलाया ध्यान
सीनियर जर्नलिस्ट नरेंद्र सेठी के अनुसार उत्तराखंड पर्यटन के क्षेत्र से अपने राजस्व को बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राजस्व के नए विकल्प तलाशे जाने चाहिए। सेठी के मुताबिक उत्तराखंड की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियों और विकल्पों पर काम करने की जरूरत है, जो राज्य की राजस्व प्राप्ति बढ़ाने में मदद कर सकें।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड के अलग-अलग विभागों की राजस्व वसूली की रफ्तार एक जैसी नहीं है। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन में 37 प्रतिशत वसूली के मुकाबले खनन 18 प्रतिशत और ऊर्जा का करेत्तर राजस्व सिर्फ 7 प्रतिशत रहा है। अब सरकार का फोकस बकाया वसूली, नए राजस्व स्रोत, डिजिटल निगरानी और विभागीय डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर है।