image: Haldwani Has India First Pollinator Park

उत्तराखंड: तितलियों-भौरों की अनोखी दुनिया, यहां है भारत का पहला पोलिनेटर पार्क

उत्तराखंड में एक हेक्टेयर क्षेत्र में फैला भारत का पहला पोलिनेटर पार्क तितलियों, मधुमक्खियों और कीट-पतंगों की 40 से ज्यादा प्रजातियों का घर है। फूलदार पौधों, मड पडलिंग और प्राकृतिक आवास की व्यवस्था वाला यह पार्क परागण करने वाले जीवों के संरक्षण की अन
Sep 24 2026 1:07PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

फूलों की पंखुड़ियों पर मंडराती रंग-बिरंगी तितलियां, भौरों की गुनगुनाहट और फूलों से आती खुशबू... अगर आपको लगता है कि कुमाऊं की खूबसूरती सिर्फ पहाड़ों और वादियों तक सीमित है, तो हल्द्वानी का पोलिनेटर पार्क आपको एक अलग ही दुनिया से रूबरू कराएगा।

Haldwani Has India’s First Pollinator Park

रामपुर रोड स्थित उत्तराखंड वन विभाग के वन अनुसंधान केंद्र, हल्द्वानी में इस पार्क को दिसंबर 2020 में खोला गया था। इसका उद्देश्य उन छोटे जीवों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार करना है, जो प्रकृति के साथ-साथ कृषि और खाद्य उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पार्क में तितलियों, मधुमक्खियों, भौरों और अन्य कीटों की 40 से ज्यादा प्रजातियों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

फूलों से लेकर तितलियों के बच्चों तक का इंतजाम

पॉलिनेटर के लिए पार्क में अलग-अलग तरह के फूलदार पौधे लगाए गए हैं। इनमें गुड़हल, सूरजमुखी, गेंदा, गुलाब और वाटर लिली समेत कई प्रजातियां शामिल हैं। इन पौधों के फूल परागण करने वाले कीटों को आकर्षित करते हैं और उन्हें भोजन उपलब्ध कराते हैं। वहीं, तितलियों के जीवनचक्र को ध्यान में रखते हुए उनके बच्चों यानी कैटरपिलर के लिए करी पत्ता और कैसिया के पौधे भी लगाए गए हैं। इन पौधों की पत्तियां तितलियों के जीवनचक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मड पडलिंग से मिलते हैं जरूरी पोषक तत्व

पार्क की सबसे खास व्यवस्थाओं में से एक मड पडलिंग है। इसके लिए यहां नम मिट्टी की व्यवस्था की गई है। आगे पढ़िए..

तितलियां और दूसरे पॉलिनेटर नम मिट्टी से सोडियम, नमक और अमीनो एसिड जैसे पोषक तत्व ग्रहण करते हैं। ये पोषक तत्व उनके विकास और प्रजनन में मददगार माने जाते हैं। इस तरह पार्क में केवल फूल और पौधे ही नहीं लगाए गए हैं, बल्कि पॉलिनेटर के जीवनचक्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है।

मृत पेड़ भी पार्क की धरोहर

पार्क में प्रकृति के चक्र को बनाए रखने के लिए मृत पेड़ों को भी हटाया नहीं जाता। वन अनुसंधान वृत्त के फारेस्टर कृष्णानंद पांडे के अनुसार, ऐसे पेड़ पक्षियों और छोटे कीटों के लिए उपयोगी होते हैं। यानी पार्क में संरक्षण का मतलब केवल रंग-बिरंगी तितलियों को बचाना नहीं, बल्कि उनके पूरे प्राकृतिक आवास को बनाए रखना है।

क्यों जरूरी हैं पॉलिनेटर?

पॉलिनेटर फूलदार पौधों में परागण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परागण के बाद पौधों में प्रजनन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और नए पौधों के विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा कई प्रमुख खाद्य फसलों के उत्पादन में भी परागण करने वाले जीवों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में तितलियों, मधुमक्खियों और दूसरे पॉलिनेटर का संरक्षण पर्यावरण के साथ-साथ कृषि व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

पार्क में प्रवेश के लिए देना होगा शुल्क

पॉलिनेटर पार्क में आने वाले लोगों के लिए प्रवेश शुल्क भी निर्धारित किया गया है। रेंजर अशोक टम्टा के अनुसार, पार्क की देखरेख के लिए विजिटर्स से शुल्क लिया जाता है। वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क 25 रुपये, जबकि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए 10 रुपये निर्धारित है। हल्द्वानी आने वाले पर्यटकों के लिए यह पार्क प्रकृति को करीब से समझने और परागण करने वाले छोटे जीवों की दुनिया देखने का एक अलग अनुभव दे सकता है।


View More Latest Uttarakhand News
View More Trending News
  • More News...

News Home