उत्तराखंड: चुनावी मौसम में आई सरकार को याद? अग्निवीरों की अतिरिक्त सेवा के फैसले पर उठे सवाल
2022 में ऐतिहासिक बताकर लागू की गई अग्निवीर योजना में अब दो साल का अतिरिक्त सेवा विकल्प देने से सरकार के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सेना की जरूरतों के मुताबिक बदलाव है या योजना के शुरुआती स्वरूप की समीक्षा?
Nov 4 2026 9:41PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
आखिर चुनाव का मौसम जो है! ऐसे में बड़े-बड़े फैसलों की समीक्षा भी होने लगती है। साल 2022 में जिस अग्निवीर योजना को केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला बताकर लागू किया था, आज उसी योजना में बदलाव की जरूरत क्यों महसूस होने लगी है? चार साल की सेवा अवधि वाली योजना में अब दो साल का अतिरिक्त विकल्प देने की बात सामने आने के बाद सरकार के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।
Agniveer Scheme Gets a Two-Year Extension
सवाल यह भी है कि अगर अग्निपथ योजना युवाओं और सेना के भविष्य के लिए इतनी ही कारगर थी, तो फिर इसमें बदलाव की नौबत क्यों आई? क्या सरकार को अब योजना के शुरुआती स्वरूप में कुछ कमियां नजर आने लगी हैं या फिर युवाओं के लगातार उठते सवालों का असर दिखने लगा है?
2022 में ऐतिहासिक फैसला, अब बदलाव की जरूरत क्यों?
जब साल 2022 में अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब सरकार ने इसे सेना में भर्ती की व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार बताया था। योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती करने और उनमें से अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान किया गया था। लेकिन अब दो साल के अतिरिक्त सेवा विकल्प की व्यवस्था ने नई बहस छेड़ दी है। आखिर जिस व्यवस्था को पूरी तैयारी और सोच-विचार के साथ लागू किया गया था, उसमें महज कुछ वर्षों के भीतर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ गई? आगे पढ़िए..
युवाओं के सवालों का जवाब या सरकार की नई रणनीति?
अग्निपथ योजना को लेकर शुरुआत से ही युवाओं के बीच कई सवाल रहे हैं। चार साल बाद भविष्य क्या होगा, नियमित नौकरी पाने की संभावना कितनी होगी और बाकी अग्निवीरों के सामने रोजगार के क्या विकल्प होंगे? अब दो साल का अतिरिक्त विकल्प मिलने के बाद भी इन सवालों का पूरी तरह समाधान हुआ है या नहीं, यह चर्चा का विषय है। सरकार के सामने भी सवाल है कि क्या यह बदलाव केवल सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है या योजना को लेकर उठ रही चिंताओं ने भी इसमें भूमिका निभाई है?
चुनाव से पहले फैसले की समीक्षा पर सियासी सवाल
राजनीति में समय और फैसलों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। 2022 में ऐतिहासिक बताई गई योजना में अब बदलाव हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार ने पहले युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया था? क्या इस बदलाव की जरूरत पहले महसूस नहीं की जा सकती थी? फिलहाल दो साल का अतिरिक्त विकल्प अग्निवीरों के सामने है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या यह बदलाव योजना को बेहतर बनाने की कोशिश है या फिर पुराने फैसले पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत का संकेत? आने वाले समय में अग्निपथ योजना का स्वरूप क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या योजना में और बदलाव होंगे या फिर चुनाव आते-आते यह भी किसी नई राजनीतिक बहस का मुद्दा बन जाएगी?