image: Coronavirus Uttarakhand:Inspiring story of sanjay sharma darmoda during lockdown

पहाड़ के दरम्वाड़ी गांव का बेटा, लॉकडाउन में गांव नहीं भागा..दिल्ली में बना गरीबों का मसीहा

समाजसेवी संजय शर्मा दरमोड़ा लॉकडाउन के दौरान पहाड़ियों के लिए जो कर रहे हैं, उसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। इनके बारे में जानकर आप भी इन्हें सैल्यूट करेंगे...
Mar 30 2020 9:14PM, Writer:कोमल नेगी

कहते हैं मतलबपरस्ती की इस दुनिया में कोई किसी के बारे में नहीं सोचता, लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते। क्योंकि इसी समाज में, इसी दुनिया में संजय शर्मा दरमोड़ा जैसे समाजसेवी भी रहते हैं, जो कि इन दिनों अपनी जरूरतों को कम कर, दूसरे गरीब पहाड़ियों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में उत्तराखंड के इस पहाड़ी की स्टोरी जान आप भी इन्हें सैल्यूट करेंगे। आपको पता ही है इन दिनों कैसी अफरा-तफरी मची है। कोरोना के फैलते ही बाहर रहने वाले लोग दौड़-दौड़कर पहाड़ लौटने लगे। बिना ये सोचे कि इनकी लापरवाही इनके गांव, इनके अपनों पर कितनी भारी पड़ सकती है। पेशे से सुप्रीम कोर्ट में वकील और समाजसेवी संजय शर्मा दरमोड़ा दिल्ली में रहते हैं। वो भी चाहते तो पहाड़ लौट आते, लेकिन मुसीबत के इस वक्त में उन्होंने गांव लौटने की बजाय दिल्ली में ही रहने का फैसला किया। संजय शर्मा दरमोड़ा दिल्ली में रहकर ही गरीब उत्तराखंडवासियों की मदद में जुटे हैं। वो मूलरूप से रुद्रप्रयाग के दरम्वाड़ी गांव के रहने वाले हैं। घर में दो बेटियां हैं, पत्नी और बूढ़ी मां है। उनका ख्याल रखने के साथ-साथ वो अपने पहाड़ भाई-बहनों और उनके परिवारों का भी अच्छी तरह ख्याल रख रहे हैं।

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राज्य समीक्षा के साथ हुई बातचीत में उन्होंने अपने विचार शेयर किए। संजय शर्मा दरमोड़ा कहते हैं कि ‘लॉकडाउन है, मैं बाहर नहीं जाऊंगा लेकिन घर बैठे ही जरूरतमंदों की मदद कर रहा हूं। घरवालों का ख्याल रखना है, लेकिन साथ ही उन गरीबों की भी मदद करनी है जो इस बुरे वक्त में दो जून की रोटी के लिए तरस रहे हैं’। इस तरह का सेवाभाव आजकल विरले ही देखने को मिलता है, लेकिन हमारा पहाड़ खुशकिस्मत है, क्योंकि यहां संजय शर्मा दरमोड़ा जैसे लोग रहते हैं। जो अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर पहाड़ और पहाड़ियों के हित के बारे में सोच रहे हैं। वो कहते हैं कि घर में बेटियों और बूढ़ी मां के लिए दूध हो या न हो लेकिन बाहर बैठा कोई गरीब भूखा नहीं मरना चाहिए। इस वक्त घर में जितना उपलब्ध है, उसी से काम चलाएं। दो बार का खाना खायें। साथ ही जितना संभव हो लोगों की मदद करें। आगे भी पढ़िए

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संजय शर्मा दरमोड़ा अब तक घर पर रहकर ही कई लोगों की मदद कर चुके हैं। किसी के घर बिग बाजार के जरिए मदद पहुंचाई तो किसी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर आर्थिक सहायता दी। कई लोगों के घर एक-एक महीने का राशन पहुंचाया। वो किसी भी कॉल को एवॉइड नहीं करते, तुरंत मदद करते हैं। कई लोगों के खाते में गूगल पे के जरिए पैसे ट्रांसफर कर चुके हैं। रुद्रप्रयाग जिले में हर छोटे दुकानदार से जरूरतमंदों की मदद करने को भी कह रहे हैं। इसका भुगतान वो खुद करेंगे। वो रुद्रप्रयाग डीएम से लगातार बात कर रहे हैं। साथ ही लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि हड़बड़ी में अपने गांव-पहाड़ ना जाएं। आपकी एक गलती, आपके गांव को श्मशान बना देगी। इसलिए जहां हैं, वहीं रहें। मुश्किल के वक्त में ऐसी कहानियां कहना और सुनना बहुत जरूरी है। ये हमारी खुशकिस्मती है कि पहाड़ में संजय शर्मा दरमोड़ा जैसे लोग भी हैं जो पहाड़ियों के भले के लिए अपना सुख-चैन सब दांव पर लगाए हुए हैं। आप भी अलग-अलग तरह से कोरोना के खिलाफ जंग में योगदान दे सकते हैं। पहाड़-गांव हमारा परिवार है। इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए लॉकडाउन का पालन करें। बाहरी राज्यों से लौटे हैं तो सेल्फ क्वॉरंटीन रहें। आपकी सतर्कता ही पहाड़ को बचा सकती है। आगे देखिए संजय शर्मा दरमोड़ा के साथ राज्य समीक्षा का एक पुराना इंटरव्यू

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