उत्तरकाशी: बादल फटने के बाद धराली में तबाही, चार लोगों की मौत.. कई जिंदगियां मलबे में दफ़न
उत्तरकाशी के धारली क्षेत्र में खीर गाढ़ के भयानक रूप लेने के बाद गंगोत्री राजमार्ग पर पड़ने वाला धारली क्षेत्र में आपदा आ गई है। क्षेत्र में बादल फटने के बाद भारी तबाही मच गई है और चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है।
Aug 5 2025 4:42PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ने वाले एक महत्वपूर्ण पड़ाव धराली क़स्बा, अतिवृष्टि के चलते मलबे के आगोश में आ चुका है। चार लोगों की दुखद मृत्यु हो गयी है और कई के मलबे में दफ़न होने की सूचना है, उत्तरकाशी जिले के हर्षिल से 3 किलोमीटर आगे लगभग सम्पूर्ण धराली गाँव के खीर गाढ़ में जलस्तर बढ़ने के कारण मलबे के आगोश में आने के दुखद समाचार हैं...
Flood in Dharali Uttarkashi after cloudburst
उत्तराखंड गजब की बारिश के बाद आपदा से जूझ रहा है। आज उत्तरकाशी के धारली क्षेत्र में खीर गाढ़ के भयानक रूप लेने के बाद गंगोत्री राजमार्ग पर पड़ने वाला धारली क्षेत्र में आपदा आ गई है। क्षेत्र में बादल फटने के बाद भारी तबाही मच गई है और चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मलबे में अभी भी कई लोग दबे पड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस भयानक हादसे पर दुख जताया है।
धराली में भारी तबाही
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धराली गांव में बादल फटने से खीर गंगा में आई भयानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। धराली बाजार पूरा का पूरा तबाह हो गया है। पानी का सैलाब धरली में आते ही लोगों में भयानक चीख-पुकार मच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक चार लोगों की मौत की खबर है जबकि कई लोगों के इस सैलाब में दबे होने की दुखद सूचना है।
मौके पर पहुंची फ़ोर्स
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पुलिस/Fire/SDRF/आर्मी सहित अन्य आपदा प्रबन्धन टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। हर प्रकार का सुरक्षा बल पुलिस एसडीआरएफ की टीम भटवाड़ी के लिए रवाना हो गई है। आज सुबह ही मौसम विभाग ने भी उत्तराखंड में 10 अगस्त तक भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की है।
पहले भी आपदा ला चुकी खीर गाड
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उत्तरकाशी की ये घाटी समय-समय पर इस प्रकार की घटनाओं की साक्षी रही है। सन 1750 एवं 1800 में जो विभीषिका इस गंगोत्री नदी में झाला के पास अवांणा_का_डाण्डा से अतिवृष्टि के चलते पूरा पहाड़ी मालवा सुखी गाँव के नीचे आकर भागीरथी के प्रवाह को रोक कर लगभग 14 किलोमीटर झील झाला से जांगला तक बना चुकी थी, जिसमें तीन गाँव पूरी तरह समाहित हो चुके थे। नतीजन आज हमे यह घाटी बहुत चौड़ी नजर आती है। इस स्थान पर 2010 से 2013 तक हर बार नाले ने अपना विकराल रूप दिखाया है।