image: Piyush Dimri joins 7th Kumaon Regiment as a Lieutenant

Uttarakhand: भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने चमोली के पियूष डिमरी, 7th कुमाऊं रेजिमेंट में हुई नियुक्ति

जनपद चमोली के पीयूष डिमरी दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। पासिंग आउट परेड में पीयूष को लेफ्टिनेंट की रैंक मिलने के साथ ही बेस्ट कैडेट का सम्मान भी प्राप्त हुआ।
Sep 15 2025 9:07PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के युवा आज हर क्षेत्र में अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम सफलता का परचम लहरा रहे हैं। इसी कड़ी में चमोली जिले के पीयूष डिमरी ने भी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने की उपलब्धि हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

Piyush Dimri joins 7th Kumaon Regiment as a Lieutenant

जनपद चमोली के पीयूष डिमरी दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। बीते शनिवार को बिहार के गया स्थित पासिंग आउट परेड में पीयूष को लेफ्टिनेंट की रैंक मिलने के साथ ही, उन्हें बेस्ट कैडेट का सम्मान भी प्राप्त हुआ। यह सम्मान उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का प्रमाण है। पीयूष डिमरी की पहली नियुक्ति सातवीं कुमाऊं रेजिमेंट में हुई है। वे अब सातवीं कुमाऊं रेजिमेंट मे लेफ्टिनेंट के पद पर लखनऊ में अपनी पहली सेवा देंगे।

चाचा से मिली सेना में भर्ती होने की प्रेरणा

दरअसल, पीयूष डिमरी चमोली जिले के कर्णप्रयाग तहसील के नाकोट गांव के निवासी हैं। पीयूष की प्रारंभिक शिक्षा ज्योति विद्यालय, ज्योर्तिमठ से हुई। इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने देहरादून की बलूनी क्लासेज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक किया। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने सेना में जाने का सपना संजोया और टेक्निकल एंट्री शॉर्ट सर्विस कमीशन में सफलता हासिल की। पीयूष के पिता उमेश डिमरी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरणा ऐरास में विज्ञान के शिक्षक हैं और उनकी माता रजनी देवी गृहिणी हैं। पीयूष के एक चाचा मुकेश डिमरी पुलिस विभाग में एसआई के पद पर कार्यरत हैं और दूसरे चाचा भारतीय सेना में तैनात हैं।

पूरे क्षेत्र का बढ़ाया मान

पीयूष को अपने चाचा से सेना में जाने की प्रेरणा मिली, इसके लिए उन्होंने दिन-रात कड़ी मेहनत की और आज उन्हें सफलता भी मिल गई। पीयूष की इस उपलब्धि की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। गांव और आसपास के इलाकों से लोग पियूष के घर उनको बधाई देने लिए पहुंच रहे हैं। पियूष ने अपनी इस उपलब्धी से अपने परिजनों सहित पूरे क्षेत्र और जिले का भी मान बढ़ाया है।


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