image: Uttarakhand Education Department to implement Monsoon Vacation

उत्तराखंड: शिक्षा विभाग लागू करेगा 'मानसून वेकेशन', 10 दिन के अवकाश पर जल्द फैसला लेगी सरकार

उत्तराखंड में हर साल मानसून अपने साथ प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लेकर आता है। इस मानसून में प्रदेश में 1211 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचा है और पूरे प्रदेश में यह संख्या 1409 तक पहुंच गई है, जिनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।
Sep 22 2025 9:58PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड में हर साल बारिश का मौसम प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लेकर आता है। भूस्खलन, सड़क अवरोध, बाढ़ और भवनों को होने वाला नुकसान बच्चों की शिक्षा पर भारी प्रभाव डालता है। ऐसे में शिक्षा विभाग अब एक नई पहल पर कार्य कर रहा है। विभाग की योजना है कि गर्मी और सर्दी की छुट्टियों की तरह राज्य में अब "मानसून वेकेशन" भी लागू किया जाए।

Uttarakhand Education Department to implement 'Monsoon Vacation'

उत्तराखंड में बीते दो महीनों के अंतर्गत मौसम अलर्ट के कारण उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग सहित कई जिलों में प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के स्कूल लंबे समय तक बंद रहे। धराली, थराली, नंदनगर, रायपुर, डोईवाला और जखोली जैसे क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल जाने का अवसर ही नहीं मिला। इसका शिक्षा सत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इस मानसून में प्रदेश में 1211 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचा है और पूरे प्रदेश में यह संख्या 1409 तक पहुंच गई है, जिनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।

ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था

उत्तराखंड शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून में प्रभावित स्कूलों में पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाएंगी और पढ़ाई का समय बढ़ाया जाएगा। निजी स्कूलों ने जहां ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था काफी सीमित है। कुछ सरकारी शिक्षक अपनी व्यक्तिगत पहल पर भी ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

मानसून सीजन में 10 दिन की छुट्टी

मानसून की इन्हीं कठिन परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग अब गंभीरता से “मानसून वेकेशन” पर विचार कर रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित योजना के अनुसार, मानसून सीजन में 10 दिन की छुट्टी दी जाएगी। इसकी भरपाई गर्मी और सर्दियों की छुट्टियों में कटौती करके की जाएगी। इससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और साथ ही पाठ्यक्रम भी समय पर पूरा हो सकेगा।

कैबिनेट मंजूरी के बाद होगा अंतिम निर्णय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा-प्रभावित राज्य उत्तराखंड के लिए यह कदम एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है। इससे जहां बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, वहीं उनकी शैक्षणिक प्रगति भी बाधित नहीं होगी। हालांकि, इस योजना पर अंतिम निर्णय विभागीय समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा। अगर यह लागू होता है, तो यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अनोखा प्रयोग साबित होगा, जो आपदाओं से जूझ रहे छात्रों के लिए राहत की बड़ी सौगात होगी।


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