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उत्तराखंड: युवा वैज्ञानिक पर देशद्रोह का आरोप, 8 साल की जेल के बाद जीता सच.. निशांत अग्रवाल बरी

उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र एटीएस ने निशांत को पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल की तकनीक लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया। अब 8 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते 1 दिसंबर 2025 को निशांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
Dec 7 2025 1:13PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित रुड़की के निशांत अग्रवाल का जीवन उस समय पूरी तरह बदल गया, जब वे ब्रह्मोस एयरस्पेस, नागपुर में अपने साथियों के साथ देश की सबसे उन्नत मिसाइल तकनीक पर काम कर रहे थे। लेकिन अचानक एक ऐसी घटना हुई जिसने परिवार की दुनिया ही बदल दी। यूपी और महाराष्ट्र एटीएस ने निशांत को पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल की तकनीक लीक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

Young scientist Nishant Agarwal acquitted after 8 years in jail

रुड़की के नेहरू नगर स्थित घर में 27 वर्षीय युवा वैज्ञानिक निशांत की पत्नी क्षितिजा अग्रवाल और उनकी मां ऋतु अग्रवाल अब भी उस सुबह को भूल नहीं पाई हैं। क्षितिजा बताती हैं “निशांत ने 2013 में ब्रह्मोस एयरस्पेस जॉइन किया था, 2018 में वे ब्रह्मोस एयरस्पेस, नागपुर में अपने साथियों के साथ देश की सबसे उन्नत मिसाइल तकनीक पर काम कर रहे थे। उसी दौरान अक्टूबर 2018 में डीआरडीओ ने उन्हें यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया था। लेकिन अवार्ड मिलने के कुछ ही दिन बाद 8 अक्टूबर 2018 की सुबह 4:30 बजे उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र एटीएस ने हमारे घर का दरवाजा खटखटाया। घर की तलाशी ली गई, लैपटॉप और मोबाइल जब्त किए गए, हम कुछ समझ ही नहीं पाए।” यूपी और महाराष्ट्र एटीएस ने निशांत को पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल की तकनीक लीक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इस आरोप के बाद निशांत आठ साल तक जेल में रहे। उस दौरान निशांत और क्षितिजा की शादी को सिर्फ साढ़े पांच महीने हुए थे और देशद्रोह के आरोपों ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

आजीवन कारावास की सजा

इन आठ सालों में जहां एक ओर निशांत ने जेल में सजा काटी तो, वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी और मां ने घर पर खुद को मानों एक अघोषित कैद में पाया। करीब नौ महीने बाद नागपुर सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई। परिवार ने हर सुनवाई में उम्मीद लगाई, लेकिन परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। 3 जून 2024 को जब सेशन कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, तो परिवार पूरी तरह टूट गया। क्षितिजा बताती हैं “हमें पता था कि फोरेंसिक रिपोर्ट में भी डेटा लीक का कोई सबूत नहीं मिला है, उसके बावजूद भी निशांत को सजा सुनाई गई। उस पल सचमुच पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और हाईकोर्ट गए।”

पड़ोसियों का बदल गया था व्यवहार

इस घटना के बाद उनके प्रति पड़ोसियों का व्यवहार बदल गया था। लेकिन हमारे रिश्तेदारों ने साथ नहीं छोड़ा, हम पर भरोसा रखा, जिससे उन्हें हिम्मत मिली।” निशांत की मां ऋतु अग्रवाल कहती हैं “बेटे को सजा मिलने के बाद मैं सांस तो ले रही थी, लेकिन जी नहीं रही थी। सिर्फ एक भरोसा था कि एक दिन सच सामने आएगा।” सजायाफ्ता घोषित होने के बाद समाज का दबाव भी बढ़ गया। एटीएस जब जांच के लिए रुड़की पहुंची और एक और लैपटॉप जब्त किया, तो मोहल्ले वालों की नजरें परिवार को चुभने लगीं। क्षितिजा ने भी बताया कि निशांत ने जेल में अपने बेटे से मिलने से मना कर दिया था। “उन्होंने कहा था एक दिन मैं पूरे सम्मान के साथ बरी होकर घर आऊंगा।”

सभी आरोपों से बरी निशांत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते 1 दिसंबर 2025 को निशांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट में यह साफ हुआ कि निशांत के लैपटॉप से कोई संवेदनशील डेटा ट्रांसफर नहीं हुआ था। जो फाइलें मिलीं, वे ट्रेनिंग समय की यूज़लेस सामग्री थीं, जिनका कोई मूल्य नहीं था। इस आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि निशांत पर लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते। लंबी कानूनी लड़ाई, सामाजिक दबाव, टूटती उम्मीदों और मानसिक दर्द के बाद आखिरकार परिवार को न्याय मिला। हाईकोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया कि निशांत अग्रवाल पर लगे आरोप तथ्यहीन और प्रमाणहीन थे। अब परिवार एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है।


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