image: Demand for CBI investigation into Ankita Bhandari murder case

उत्तराखंड से दिल्ली तक अंकिता भंडारी केस में बड़ा जनआक्रोश, CBI जांच की मांग तेज

अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच और कथित वीआईपी का नाम उजागर करने की मांग को लेकर उत्तराखंड से दिल्ली तक उग्र प्रदर्शन हुए।इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि जनता महिला सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग है।
Jan 5 2026 7:41PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सीबीआई जांच की मांग ने उत्तराखंड से दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है। एक ओर जनआंदोलन और विपक्षी दबाव है, तो दूसरी ओर सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से जारी जांच पर भरोसा जताया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

Demand for CBI investigation into Ankita Bhandari murder case

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सीबीआई जांच और कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग के साथ जनआक्रोश तेज हो गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास देहरादून की ओर कूच किया। इस दौरान पुलिस के साथ कई बार नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, वहीं जवाबी प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी भी सड़क पर उतर आई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए और कथित वीआईपी का नाम उजागर कर उसे कड़ी सजा दिलाई जाए। आंदोलनकारियों ने बढ़ती महिला हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि इस प्रकरण में शुरुआत से जनता ने ही संघर्ष किया है और जनदबाव के चलते ही आरोपी जेल तक पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ी तो चक्का जाम जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन

सीएम आवास की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कई लोग बैरिकेड पर चढ़ गए और धक्का-मुक्की हुई। बाद में विभिन्न संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें दर्ज कराईं। इधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रवासी उत्तराखंडियों ने भी धरना-प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर दोषियों और कथित वीआईपी को बचाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर जांच को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई को नहीं सौंपा गया, तो दिल्ली में भाजपा मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।


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