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नंदा देवी राजजात 2026 स्थगित: क्यों टली दुनिया की सबसे पवित्र और कठिन पैदल यात्रा, जानिये

उत्तराखंड की पवित्र और बेहद कठिन पैदल यात्रा नंदा देवी राजजात को 2026 में मलमास, सितंबर अंत में मौसम के खतरे और 2025 की बाढ़-भूस्खलन से क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण स्थगित किया गया है। प्रशासन और आयोजकों का फोकस श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा मार्ग की
Jan 21 2026 12:00PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे पवित्र और ऐतिहासिक यात्राओं में गिनी जाने वाली ‘नंदा देवी राजजात’ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। श्रद्धा, परंपरा और हिमालय की कठिन परीक्षा से जुड़ी यह यात्रा दुनिया की सबसे कठिन पैदल यात्राओं में शामिल मानी जाती है। लेकिन इस बार इसे स्थगित/टालने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है।

Nanda Devi Raj Jat yatra 2026 postponed

राजजात यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, लोक आस्था और हजारों साल पुरानी परंपरा का प्रतीक है। हर बार यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक अद्भुत अनुभव लेकर आती है। ऐसे में यात्रा का स्थगित होना लोगों के लिए चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है।

यात्रा स्थगित होने के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें?

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जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के पीछे कुछ बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें धार्मिक मान्यताओं से लेकर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तक की चिंताएं शामिल हैं। प्रमुख कारणों में मलमास (अधिमास) के कारण शुभ तिथियों में बदलाव और 16,000 फीट पर जानलेवा ठंड का पड़ना बताया जा रहा है।

मलमास (अधिमास) के कारण शुभ तिथियों में बदलाव

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धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 2026 में मलमास (अधिमास) पड़ रहा है। इसी वजह से यात्रा की पारंपरिक शुभ तिथियां आगे खिसक गईं और आयोजन की संभावित तारीखें सितंबर के अंतिम सप्ताह तक पहुंचने की बात कही जा रही है। राजजात यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में तिथि का महत्व बहुत बड़ा माना जाता है। इसलिए तिथि में बदलाव ने प्रशासन और आयोजन से जुड़े पक्षों को नई योजना बनाने के लिए मजबूर कर दिया।

मौसम का खतरा: 16,000 फीट पर जानलेवा ठंड

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नंदा देवी राजजात यात्रा का मार्ग अत्यंत कठिन है और इसका सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रूपकुंड और होमकुंड जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं, जो करीब 16,000 फीट तक पहुंचते हैं। मलमास के कारण तिथि बदलाव, मौसम का जोखिम और 2025 की आपदा के बाद कमजोर हुआ ढांचा—इन तीनों वजहों ने यात्रा को स्थगित करने के फैसले को मजबूती दी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और स्थानीय अनुभव

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विशेषज्ञ कहते हैं कि मार्ग पर अचानक भारी हिमपात हो सकता है, तापमान तेजी से गिर सकता है, कड़ाके की ठंड और तेज हवाएं बढ़ सकती हैं। स्थानीय बताते हैं रास्तों पर बर्फ जमने से फिसलन और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि यात्रा को लेकर जान-माल की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है।

2025 की भारी बारिश से ढांचा बुरी तरह प्रभावित

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पिछले साल यानी 2025 में आई बाढ़ और भूस्खलन ने उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया था। बताया जा रहा है कि राजजात यात्रा के मार्ग पर भी पैदल रास्ते टूट गए, पुल और संपर्क मार्ग कमजोर हुए, कई जगहों पर भूस्खलन का खतरा बना रहा और बेस कैंप और जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुईं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यात्रा से पहले रूट को सुरक्षित, सुविधाजनक और पूरी तरह तैयार किया जाए। मरम्मत, पुनर्निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था में समय लगना स्वाभाविक है, इसलिए यात्रा को स्थगित करने का फैसला एक सावधानीपूर्ण कदम माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया

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यात्रा स्थगित होने की खबर के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से सही मान रहे हैं, वहीं कुछ श्रद्धालु मानते हैं कि राजजात यात्रा का आयोजन समय पर होना चाहिए, क्योंकि यह आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है। अब सबकी नजर इस पर है कि यात्रा की नई तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा कब होती है और मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।


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