image: Villagers in Sahiya Set New Rules to Reduce Wedding Expenses

Uttarakhand: शादियों में देना होगा सिर्फ ₹101 का शगुन, फिजूलखर्ची पर ब्रेक.. 12 गांवों ने बनाए सख्त नियम

देहरादून में साहिया क्षेत्र के खत सिली गोथान से जुड़े 12 गांवों ने शादी-विवाह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए नए सामाजिक नियम तय किए हैं। अब विवाह में सिर्फ 101 रुपये का शगुन दिया जाएगा और बीयर परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
Feb 3 2026 7:32PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के साहिया क्षेत्र में सामाजिक सुधार की एक मिसाल पेश की गई है। यहां खत सिली गोथान से जुड़े 12 गांवों के ग्रामीणों ने शादी-विवाह जैसे आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए सर्वसम्मति से नए नियम तय किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य सामाजिक दबाव कम करना, आर्थिक बोझ घटाना और पारंपरिक सादगी को बढ़ावा देना है।

Villagers in Sahiya Set New Rules to Reduce Wedding Expenses

देहरादून के पास सहिया क्षेत्र के ग्राम बड़नु स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल के मैदान में आयोजित बैठक में खत सिली गोथान से जुड़े 12 गांवों के लोग एकत्र हुए। बैठक की अध्यक्षता खत स्याणा मंजीत सिंह तोमर ने की। इस बैठक में तय किया गया कि विवाह समारोह में शगुन के रूप में अब केवल 101 रुपये ही दिए जाएंगे। इससे पहले शगुन और उपहारों को लेकर सामाजिक प्रतिस्पर्धा और अनावश्यक खर्च देखने को मिलता था।

शादी समारोहों में बीयर परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध

बैठक में एक अहम फैसला यह भी लिया गया कि खत से जुड़े गांवों में होने वाले शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में बीयर परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ग्रामीणों का मानना है कि इससे आयोजनों की मर्यादा बनी रहेगी और युवाओं में गलत प्रवृत्तियों पर भी अंकुश लगेगा।

परंपराओं में भी किया गया संतुलन

ग्रामीणों ने कई पारंपरिक प्रथाओं को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए—
परिवार की पहली शादी में परंपरा के अनुसार मामा पक्ष से एक बकरा व आटा-चावल, सूजी आदि लाने की अनुमति
टीका प्रथा पर पाबंदी
खत की बेटियों की ओर से बकरा लाने या देने पर रोक
रईणी भोज में चांदी का सिक्का और वस्त्र देने की परंपरा समाप्त
इन फैसलों का उद्देश्य परंपरा और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाना बताया गया।

नियम तोड़ने पर सामाजिक बहिष्कार

बैठक में यह भी साफ किया गया कि तय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक इस पहल का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।

2027 में मनाया जाएगा शिलगूर महाराज का जागड़ा

बैठक में ग्राम मसराड़ स्थित शिलगूर महाराज के 12 साल में एक बार मनाए जाने वाले जागड़े ‘बुरांश’ को वर्ष 2027 में आयोजित करने पर भी सहमति बनी। यह आयोजन खत सिली गोथान की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है।

सामाजिक संदेश: सादगी ही असली समृद्धि

ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से न केवल आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि समाज में बराबरी, सादगी और आपसी सम्मान की भावना मजबूत होगी। साहिया क्षेत्र की यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।


View More Latest Uttarakhand News
View More Trending News
  • More News...

News Home