Uttarakhand News: मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम में धोखे से बेची जमीन, 6 महीने से तहसील के चक्कर काट रहा पीड़ित
Gairsain News: गैरसैंण के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में करीब 20 नाली पुश्तैनी जमीन गलत तरीके से बेचने का आरोप। पीड़ित परिवार ने रजिस्ट्री से पहले शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया।
Sep 8 2026 2:06PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
गैरसैंण तहसील क्षेत्र के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विधानसभा परिसर भराड़ीसैंण से सटे इस गांव में एक परिवार पिछले करीब छह महीने से अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि राजस्व विभाग को पहले से जानकारी देने के बावजूद उनकी जमीन की बिक्री कर दी गई। परिवार ने मामले की शिकायत तहसील प्रशासन से लेकर क्षेत्रीय विधायक और गढ़वाल कमिश्नर तक की है।
Gairsain Land Fraud: 20 Nali Ancestral Land Sold Allegedly
पीड़ित सुरेंद्र सिंह पुत्र मदन सिंह, निवासी सारकोट का आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने इसी साल 13 मई को उनकी करीब 20 नाली पैतृक भूमि गलत तरीके से बेच दी। सुरेंद्र सिंह के अनुसार, उनके पिता मदन सिंह ने जमीन की रजिस्ट्री से पहले ही 6 अप्रैल को तहसील गैरसैंण में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद कथित रूप से जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत के बावजूद भूमि बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ना कई सवाल खड़े करता है।
पहले भी सामने आया था मामला
बताया गया कि मई महीने में मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट के जूनियर हाईस्कूल के पास करीब 50 नाली भूमि की बिक्री का मामला सामने आया था। इसमें से 15 नाली भूमि की रजिस्ट्री एक एनजीओ के नाम होने के कारण निरस्त किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद शेष भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर भी सवाल उठे। पीड़ित सुरेंद्र सिंह का आरोप है कि कुल 35 नाली भूमि में से करीब 20 नाली जमीन ऐसी बेची गई, जिस पर भूमि बेचने वाले व्यक्ति का वर्तमान में कब्जा नहीं था।
पीड़ित ने बताई खसरा नंबरों वाली जमीन
पीड़ित पक्ष के अनुसार, खाता-खतौनी संख्या 0093 में शामिल खसरा नंबर 663, 671 और 672 की करीब 12 नाली भूमि उनके परिवार से संबंधित है। इसके अलावा खसरा नंबर 664 और 668 की करीब 8 नाली भूमि को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। पीड़ित का आरोप है कि कुल मिलाकर करीब 20 नाली जमीन को गलत तरीके से बेच दिया गया। आगे पढ़िए..
14 खाताधारकों की रजामंदी नहीं लेने का आरोप
सुरेंद्र सिंह ने भूमि बिक्री प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संबंधित संयुक्त खाते में कुल 14 खाताधारक शामिल हैं, लेकिन भूमि बिक्री के दौरान सभी की सहमति नहीं ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि भूमि विक्रय की प्रक्रिया में सह-खाताधारकों की रजामंदी और कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सुनवाई के लिए लगातार काट रहे तहसील के चक्कर
पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्होंने 13 जुलाई 2026 को तहसीलदार को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 23 जुलाई को पक्ष रखने के लिए बुलाया गया, लेकिन तहसीलदार के अन्यत्र होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। परिवार ने 7 अगस्त को भी तहसील पहुंचकर सुनवाई की उम्मीद की, लेकिन उस दिन भी मामले का निस्तारण नहीं हो पाया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि लगातार तारीख मिलने के बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
डीएम ने जून में गठित की थी जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के जिलाधिकारी की ओर से जून महीने में अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट उन्हें अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा परिवार तहसीलदार की ओर से 1 जुलाई 2026 को की गई जांच रिपोर्ट की प्रति भी मांग रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि डेढ़ महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। आगे पढ़िए..
इश्तेहार में नामों को लेकर भी उठाए सवाल
पीड़ित सुरेंद्र सिंह ने दाखिल-खारिज प्रक्रिया के तहत जारी इश्तेहार में नामों को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इश्तेहार में हरि सिंह पुत्र सिताब सिंह और महेंद्र सिंह पुत्र अषाढ़ सिंह दो अलग-अलग व्यक्तियों के नामों को एक साथ दर्शाने में गलती की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस संबंध में भी तहसील प्रशासन से जवाब मांगा गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।
भूमि खरीद में भू-कानून के पालन पर भी सवाल
मामले में कथित तौर पर 35 नाली भूमि की खरीद रवि चौहान निवासी अल्मोड़ा और हरि सिंह निवासी बागेश्वर द्वारा की गई। पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाया है कि भूमि खरीद के दौरान उत्तराखंड के भू-कानून और अन्य निर्धारित मानकों का पालन किया गया या नहीं। परिवार का कहना है कि जिला प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
9 सितंबर को होगी आपत्ति की सुनवाई
मामले में तहसीलदार हरीश पांडे ने बताया कि कानूनगो से जांच आख्या मांगी गई है। उन्होंने कहा कि 9 सितंबर को आपत्ति की सुनवाई निर्धारित है और सुनवाई के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रजिस्ट्री से पहले शिकायत के बावजूद कैसे हुई जमीन की बिक्री?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पीड़ित पक्ष की ओर से रजिस्ट्री से पहले राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दिए जाने के बावजूद भूमि की रजिस्ट्री कैसे हुई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें जांच से संबंधित आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। अब सभी की नजरें 9 सितंबर को होने वाली सुनवाई और प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं।