image: Pregnant Woman Carried 6 KM to Hospital in Uttarakhand

उत्तराखंड: पहाड़ की दर्दनाक तस्वीर, गर्भवती को 6 किमी डंडी-कंडी में उठाकर चले ग्रामीण; इलाज के लिए भी भटकना पड़ा

उत्तराखंड के दुर्गम पिनाऊं गांव में गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों ने उसे 6 किमी तक डंडी-कंडी और कुर्सी के सहारे पहुंचाया। खराब विजिबिलिटी के कारण हेली सेवा भी वापस लौट गई।
Sep 3 2026 9:52PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिनाऊं और बलाण क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उसे करीब 6 किलोमीटर तक डंडी-कंडी और कुर्सी के सहारे पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ा। इसके बाद महिला को देर रात देवाल अस्पताल और फिर बागेश्वर अस्पताल पहुंचाया गया।

Pregnant Woman Carried 6 KM to Hospital in Uttarakhand

जानकारी के अनुसार पिनाऊं गांव निवासी 33 वर्षीय खिमली देवी, पत्नी धन सिंह, की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण महिला को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया। ग्रामीणों ने महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी यानी डोली का इंतजाम किया। इसके बाद पैदल रास्ते को साफ कर महिला को डोली में बैठाया गया और ग्रामीण करीब 6 किलोमीटर तक पैदल चलते रहे।

बंद रास्तों ने बढ़ाई मुश्किलें

महिला को अस्पताल पहुंचाने के दौरान ग्रामीणों को कई स्थानों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खराब और बाधित पैदल रास्तों के कारण महिला को सुरक्षित बाहर निकालना आसान नहीं था। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने के कारण क्षेत्र में गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को आज भी इसी तरह डोली या डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

विधायक के प्रयास से बुलाई गई हेली सेवा

ग्राम प्रधान लखपत दानू ने मामले की जानकारी थराली विधायक भूपाल राम टम्टा को दी। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए हेली सेवा की व्यवस्था कराने का प्रयास किया गया। ग्रामीण महिला को लेकर बलाण गांव में हेलीकॉप्टर के लिए निर्धारित स्थान तक पहुंचे। बताया गया कि ग्रामीण दोपहर करीब दो बजे वहां पहुंच गए थे और हेली सेवा का इंतजार करते रहे। आगे पढ़िए..

खराब विजिबिलिटी के कारण लौट गया हेलीकॉप्टर

विधायक भूपाल राम टम्टा के प्रयास से हेली सेवा भेजी गई, लेकिन क्षेत्र में विजिबिलिटी कम होने के कारण हेलीकॉप्टर आधे रास्ते से ही वापस लौट गया। शाम करीब साढ़े पांच बजे तक इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने महिला को सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया।

तीन किलोमीटर तक कुर्सी पर बैठाकर पैदल चले ग्रामीण

हेली सेवा नहीं पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने महिला को करीब तीन किलोमीटर तक कुर्सी में बैठाकर पैदल पहुंचाया। इसके बाद सड़क तक पहुंचने पर अलग-अलग वाहनों की मदद से महिला को देर रात देवाल अस्पताल ले जाया गया। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

एएनएम को पहले ही दी गई थी सूचना

ग्रामीणों के अनुसार महिला की स्थिति की जानकारी पहले ही फोन के माध्यम से एएनएम को दे दी गई थी। अस्पताल पहुंचने के बाद दोबारा सूचना देने पर एएनएम वहां पहुंचीं। महिला की स्थिति को देखते हुए उसे आगे रेफर किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस के लिए भी उन्हें दो घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद महिला को आगे अस्पताल ले जाया गया और सुबह करीब चार बजे उसे बागेश्वर अस्पताल पहुंचाया गया। आगे पढ़िए..

थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने कहा कि गर्भवती महिला और जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य को देखते हुए तत्काल हेली सेवा की व्यवस्था कराने का प्रयास किया गया था। उन्होंने बताया कि खराब विजिबिलिटी के कारण हेलीकॉप्टर आधे रास्ते से ही वापस लौट गया। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को डंडी-कंडी के माध्यम से सड़क तक पहुंचाया।

आखिर कब तक डंडी-कंडी के सहारे पहुंचे मरीज?

ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र में पहली घटना नहीं है। सड़क सुविधा के अभाव में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को आज भी डंडी-कंडी, डोली, कुर्सी और पैदल रास्तों के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से गांव तक सड़क पहुंचाने के साथ ही अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

पहाड़ की हकीकत फिर आई सामने

यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को सामने लाती है। एक ओर पहाड़ों में विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों के लोगों को आज भी इलाज के लिए मरीजों को कंधों और डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक पहाड़ के लोगों को इलाज के लिए सड़क का इंतजार करना पड़ेगा?


View More Latest Uttarakhand News
View More Trending News
  • More News...

News Home