image: Spiritual Power in Extreme Cold at Snow-Covered Badrinath

बदरीनाथ धाम में आस्था का अद्भुत नजारा! बर्फ में आधा दबा साधु, -15°C में भी नहीं डिगी श्रद्धा

कपाट बंद होने के बावजूद बदरीनाथ धाम में आस्था की लौ जलती हुई है। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर माइनस 15 डिग्री तापमान में 15 साधु-संत कठोर योग साधना कर रहे हैं। स्वामी अरसानंद महाराज पिछले चार वर्षों से यहां निरंतर साधना में लीन हैं।
Feb 5 2026 8:21PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

भू-वैकुंठ के नाम से विख्यात बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने के बाद भी आस्था की ज्योति अनवरत प्रज्वलित है। जब शीतकाल में पूरी बदरीशपुरी निर्जन हो जाती है और भगवान बदरी विशाल शीतकालीन प्रवास के लिए पांडुकेश्वर विराजमान होते हैं, तब भी 11 हजार फीट की बर्फीली ऊंचाई पर 15 तपस्वी साधु-संत कठोर योग साधना में लीन रहते हैं।

Spiritual Power in Extreme Cold at Snow-Covered Badrinath

वर्तमान समय में बदरीनाथ धाम दो से तीन फीट मोटी बर्फ की सफेद चादर से ढका हुआ है। शाम ढलते ही यहां का तापमान शून्य से 15 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है। इन अत्यंत विकट परिस्थितियों में भी प्रशासन की विशेष अनुमति से साधु-संत कुटियाओं, गुफाओं और आश्रमों में तपस्या कर रहे हैं।

अनवरत साधना बनी आस्था की मिसाल

इन साधकों में स्वामी अरसानंद जी महाराज भी शामिल हैं, जो माइनस 15 डिग्री तापमान में बर्फ के बीच साधना कर आस्था और तप का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। स्वामी अरसानंद महाराज पिछले चार वर्षों से बारहों महीने बदरीनाथ धाम में निवास कर भगवान बदरी विशाल के ध्यान में लीन हैं।

चारों युगों में स्थिर रहा बदरिकाश्रम का महत्व

Importance of Badarikaashram
1 /

बदरीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन उनियाल ने बदरिकाश्रम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह धाम चारों युगों में स्थिर रहा है। शास्त्रों के अनुसार सतयुग में यह मुक्ति प्रदा क्षेत्र, त्रेतायुग में सिद्धिदा, द्वापर युग में प्रविशालाद्ध और कलियुग में बदरिकाश्रम कहलाया है। यह वह पुण्यभूमि है जहां आज भी वेद, तप और भक्ति की परंपराएं जीवंत हैं।

कलियुग में नाम जप और ध्यान से मोक्ष का मार्ग

Spiritual Power in Extreme Cold at Snow-Covered Badrinath
2 /

भगवान बदरी विशाल की सेवा से पीढ़ियों से जुड़े पंडित राकेश डिमरी के अनुसार, शास्त्रों में कलियुग में मोक्ष का सबसे सरल मार्ग हरि नाम संकीर्तन और ध्यान बताया गया है। जहां सतयुग में कठोर तप और द्वापर में विधि-विधान से पूजा का महत्व था, वहीं आज साधु-संत नाम जप और ध्यान के माध्यम से मोक्ष के द्वार पर अडिग खड़े हैं।

प्रशासन की अनुमति से शीतकालीन साधना

Spiritual Power in Extreme Cold at Snow-Covered Badrinath
3 /

ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि नियमों के तहत प्रशासन की अनुमति लेकर ही साधु-संत शीतकाल में बदरीनाथ धाम में रुकते हैं। कड़ाके की ठंड, हिम और सन्नाटे के बीच चल रही यह साधना आस्था की अदम्य शक्ति को दर्शाती है और यह प्रमाणित करती है कि कठिनतम परिस्थितियों में भी तप और विश्वास का दीपक कभी बुझता नहीं।


View More Latest Uttarakhand News
View More Trending News
  • More News...

News Home