NHM रिपोर्ट में खुली उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते डॉक्टर.. 99% अस्पताल मानकों पर फिसड्डी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट में उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी है...
Jul 27 2026 9:04PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों पर अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पताल डॉक्टरों, विशेषज्ञों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। खासकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
NHM Report Reveals Shortage of Doctors in Uttarakhand
जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में उत्तराखंड के प्राथमिक, सामुदायिक और जिला अस्पतालों की वास्तविक स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में कार्य करने के प्रति डॉक्टरों की अनिच्छा के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के पद खाली हैं। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है और कई अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स (IPHS) के अनुसार राज्य में बड़ी संख्या में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों के पद रिक्त हैं, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर पड़ रहा है।
PG पढ़ रहे डॉक्टर भी बढ़ा रहे हैं संकट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई नियुक्त चिकित्सा अधिकारी पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई कर रहे हैं। वे वेतन तो प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण के कारण नियमित सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। इससे पहले से मौजूद डॉक्टरों की कमी और गंभीर हो गई है। इसके अलावा राज्य में अब तक अलग से विशेषज्ञ डॉक्टर कैडर का गठन नहीं किया गया है, हालांकि इस दिशा में योजना पर काम चल रहा है। आगे पढ़िए..
NHM में भी कई पद खाली
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मानव संसाधन स्वास्थ्य सेल (HRH Cell) का गठन किया गया है, लेकिन यहां भी कार्यक्रम अधिकारी का पद खाली है। NHM कर्मचारियों के लिए कार्य विवरण (Terms of Reference) तैयार हैं, लेकिन नियमित भर्ती की गति धीमी है। अधिकांश नियुक्तियां अनुबंध आधारित हैं, जिनका नवीनीकरण हर वर्ष किया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए राज्य सरकार "You Quote We Pay" योजना के माध्यम से भी प्रयास कर रही है, जबकि चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती मासिक वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए की जा रही है।
99% अस्पतालों का आकलन, अधिकांश संस्थान मानकों से पीछे
रिपोर्ट में राज्य के 2,577 प्राथमिक एवं माध्यमिक स्वास्थ्य संस्थानों (सब हेल्थ सेंटर, PHC, CHC, उप-जिला और जिला अस्पताल) का मूल्यांकन किया गया।
मुख्य निष्कर्ष:-
99% स्वास्थ्य संस्थानों का IPHS मानकों के अनुसार आकलन किया गया।
अधिकांश अस्पताल Aspirant Category में पाए गए।
इन संस्थानों का स्कोर केवल 25% से 50% के बीच रहा।
कम स्कोर का सबसे बड़ा कारण डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कमी रही।
गुणवत्ता प्रमाणन में भी उत्तराखंड पीछे
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (NQAS) के तहत राज्य की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार केवल 47 स्वास्थ्य संस्थानों (करीब 2%) को गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त है। कई अस्पतालों को दोबारा प्रमाणन की आवश्यकता है। हालांकि गोपेश्वर जिला अस्पताल ने 2024 में गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त किया और 2025 में कायाकल्प पुरस्कार जीतकर बेहतर प्रदर्शन का उदाहरण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञ क्या मानते हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल डॉक्टरों की भर्ती पर्याप्त नहीं होगी। पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवाएं देने के लिए बेहतर सुविधाएं, आवास, सुरक्षा, आधुनिक उपकरण और आकर्षक प्रोत्साहन नीति भी जरूरी है। यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार करना चुनौती बना रहेगा।