image: Dehradun Hospital Accused of Withholding Body Over  2 37 Lakh Bill

देहरादून: 2 लाख 37 हजार दो तब होगा अंतिम संस्कार, इलाज नहीं..व्यापार कर रहा ग्राफिक एरा अस्पताल

देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल पर आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद परिजनों से 2.37 लाख रुपये की मांग की गई और बिल न चुकाने पर शव सौंपने से इनकार कर दिया गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में हंगामा किया।
Feb 10 2026 8:05PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड में सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक की कार्यप्रणाली पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों के साथ बेरुखी और अमानवीय व्यवहार के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला राजधानी देहरादून से सामने आया है, जहां ग्राफिक एरा अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है।

Graphic Era Hospital Demands Lakhs to Release Dead Body

जानकारी के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी एक मरीज का इलाज देहरादून स्थित ग्राफिक एरा अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। इसके बाद जब परिजन शव ले जाने पहुंचे, तो अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंपने से इनकार कर दिया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा कि पहले 2 लाख 37 हजार रुपये का बिल जमा किया जाए, तभी शव सौंपा जाएगा। परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला दिया, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कोई रियायत नहीं दी।

आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने उनकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाते हुए शव को अपने कब्जे में रखा, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट गया। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई संवेदनशील रवैया नहीं अपनाया गया। शव न मिलने से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मनमानी कर रहे हैं और मरीजों व उनके परिजनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

घटना के बाद एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जब किसी परिवार का सदस्य मौत के बाद भी सम्मान के साथ विदा नहीं हो पा रहा, तो यह सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

प्रशासन की भूमिका पर भी उठे प्रश्न

फिलहाल इस मामले में प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लोगों की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


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