image: Teachers Warn of Board Exam Boycott After Assault on Education Director

उत्तराखंड: बोर्ड एग्जाम पर संकट! काऊ समर्थकों की मारपीट के बाद शिक्षकों की बहिष्कार की चेतावनी

उत्तराखंड में विधायक पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से मारपीट के आरोप के बाद शिक्षक संगठनों ने बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी है। छात्रों का भविष्य संकट में, सरकार पर समाधान का दबाव।
Feb 21 2026 7:50PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर जहां छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर एक राजनीतिक विवाद ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ कथित मारपीट के आरोपों से जुड़ा है। घटना के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों में आक्रोश फैल गया है।

Teachers Warn of Board Exam Boycott After Assault on Education Director

शनिवार को विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचे। बताया गया कि वे एक सरकारी विद्यालय का नाम बदले जाने के मुद्दे पर बातचीत करने पहुंचे थे। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन किसी मुद्दे पर कहासुनी बढ़ गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय में घुसकर उनके साथ मारपीट की। हालांकि, इस मामले में अब तक कोई ठोस पुलिस कार्रवाई सामने नहीं आई है। घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षक संगठनों में रोष फैल गया। शिक्षकों का कहना है कि यदि एक वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो अन्य शिक्षक और कर्मचारी कैसे सुरक्षित रहेंगे? इसी के विरोध में शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार की चेतावनी

राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार से बातचीत जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं होती और शिक्षकों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते, तो संगठन बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार का निर्णय ले सकता है। यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में शिक्षकों की भूमिका अनिवार्य होती है—चाहे परीक्षा केंद्रों का संचालन हो, मूल्यांकन कार्य हो या निगरानी।

छात्रों का भविष्य दांव पर?

प्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। लाखों छात्र महीनों से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। यदि शिक्षक बहिष्कार का निर्णय लेते हैं, तो परीक्षा कार्यक्रम बाधित हो सकता है, परिणाम घोषित होने में देरी हो सकती है, छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। अभिभावकों में भी चिंता बढ़ती जा रही है कि राजनीतिक विवाद की कीमत कहीं उनके बच्चों को न चुकानी पड़े।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए। छात्रों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर उचित कार्रवाई हो, शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था पटरी पर बनी रहे।


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