image: All Accused Acquitted in Minor Kidnapping rape Case

उत्तराखंड: नाबालिग का अपहरण, दुष्कर्म और जबरन शादी.. पुलिस की लापरवाही के कारण 6 आरोपी बरी

विकासनगर क्षेत्र में नाबालिग के अपहरण, जबरन शादी और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं।
Mar 27 2026 7:41PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

विकासनगर थाना क्षेत्र से सामने आए एक सनसनीखेज मामले में अदालत ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण, जबरन शादी और दुष्कर्म से जुड़ा था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया।

All Accused Acquitted in Minor Kidnapping, rape Case

पीड़िता के अनुसार, 12 अक्टूबर 2020 को वह खेतों में शौच के लिए गई थी, जहां पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने उसे बहाने से बुलाया। आरोप है कि उसे बेहोश कर कार में बैठाकर सहारनपुर ले जाया गया। वहां उसे करीब एक साल तक बंधक बनाकर रखा गया और बाद में एक अधेड़ व्यक्ति से जबरन शादी कर दी गई। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया।

अदालत में सुनवाई और फैसला

मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय (पोक्सो) में हुई, जहां न्यायाधीश रजनी शुक्ला ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा। इस आधार पर सुकरमपाल, सुनील, शशि, लक्ष्मी, संदीप और सविता को बरी कर दिया गया।

पुलिस जांच में गंभीर खामियां

सुनवाई के दौरान पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हुए। बचाव पक्ष की जिरह में यह सामने आया कि जांच अधिकारी ने मामले में पर्याप्त साक्ष्य एकत्र नहीं किए।
अपहरण में इस्तेमाल की गई कार को जांच में शामिल नहीं किया गया।
आरोपियों की कॉल डिटेल्स और आपसी संपर्क के प्रमाण जुटाए नहीं गए।
कथित लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों को भी नजरअंदाज किया गया।
इन खामियों के कारण मामला कमजोर पड़ गया और आरोप साबित नहीं हो सके।

मेडिकल रिपोर्ट भी बनी कमजोर कड़ी

मेडिकल जांच में भी पीड़िता के आरोपों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो पाई। चिकित्सकों ने दुष्कर्म के संबंध में कोई स्पष्ट राय नहीं दी, जबकि बंधक बनाकर मारपीट करने के आरोपों के भी ठोस प्रमाण नहीं मिले। इससे अभियोजन पक्ष की स्थिति और कमजोर हो गई।

न्याय प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस मामले में आरोपियों के बरी होने के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद, पर्याप्त साक्ष्य न जुटा पाने के कारण मामला अदालत में टिक नहीं पाया।


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