देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के नाम शानदार उपलब्धि, ‘ग्रीन कॉरिडोर’ में 18 प्रजातियों के प्रमाण
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का 12 किमी एलिवेटेड रोड एशिया का सबसे बड़ा ग्रीन कॉरिडोर बन गया है। यहां 18 प्रजातियों के वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही दर्ज की गई है, जिससे यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण बन गई है।
Mar 30 2026 2:32PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे विकास और विरासत के संतुलन की एक बेहतरीन मिसाल बनकर उभर रहा है। यह एक्सप्रेसवे जहां एक ओर दोनों शहरों के बीच दूरी कम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
Delhi-Dehradun Expressway Emerges as Asia’s Largest Green Corridor
उत्तराखंड सीमा में गणेशपुर से डाटकाली तक बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड अब एशिया के सबसे बड़े ग्रीन कॉरिडोर के रूप में पहचान बना चुका है। इसे खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही में कोई बाधा न आए। यह एलिवेटेड रोड राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक रेंज के बीच बनाया गया है, ताकि हाथी समेत अन्य वन्यजीव बिना किसी डर के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जा सकें।
18 प्रजातियों की मौजूदगी से मिला प्रमाण
भारतीय वन्यजीव संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस कॉरिडोर में वन्यजीवों की 18 प्रजातियां सक्रिय रूप से देखी गई हैं। कैमरा ट्रैप में हाथी, गुलदार, सियार, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर और मोर जैसे कई जीवों की तस्वीरें कैद हुई हैं।
शोर और रोशनी का भी रखा गया ध्यान
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वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे पर साउंड बैरियर लगाए गए हैं। साथ ही विशेष प्रकार की लाइटिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे जानवरों पर रोशनी का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
पहले था सड़क चौड़ीकरण का प्लान
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पहले इस मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण की योजना बनाई गई थी, लेकिन वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए योजना में बदलाव किया गया। इसके बाद एलिवेटेड रोड का निर्माण किया गया, जिससे ऊपर वाहन चलें और नीचे जंगल का प्राकृतिक जीवन सुरक्षित रहे।
प्रधानमंत्री के उद्घाटन की चर्चा
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे इन दिनों चर्चा में है, क्योंकि इसका उद्घाटन जल्द ही नरेन्द्र मोदी के हाथों होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन तैयारियां जोरों पर हैं। यह ग्रीन कॉरिडोर वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जंगलों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही और भी सुगम हो गई है।