image: Dehradun Faces Marriage Crisis Due to Gender Imbalance

Uttarakhand news: देहरादून में 50 हजार कुंवारों के लिए अशुभ संकेत, शादी के लिए नहीं मिल रही लड़कियां

Dehradun News: देहरादून में लिंगानुपात के असंतुलन से शादी का संकट गहराया। हर तीन लड़कों में से दो को जीवनसाथी मिलना मुश्किल है। जानें पूरी रिपोर्ट और कारण।
Apr 11 2026 3:01PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड, जिसे दुनिया एक खूबसूरत वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में देखती है, अब वहां के युवाओं के लिए खुद की शादी करना ही एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पहाड़ों की हसीन वादियों में घर बसाना अब आसान नहीं रहा और यह समस्या केवल दूर-दराज के गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब शहरों तक भी पहुंच चुकी है।

Dehradun Faces Marriage Crisis Due to Gender Imbalance

राजधानी देहरादून में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक हो गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार यहां विवाह योग्य लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या बहुत कम है। हालत यह है कि हर तीन लड़कों में से दो को जीवनसाथी मिलना मुश्किल होता जा रहा है, जो एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार 25 से 29 वर्ष की आयु वर्ग में 35,000 से अधिक युवक शादी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि लड़कियों की संख्या केवल 11,836 है। इसी तरह 30 से 34 वर्ष की उम्र में 10,103 युवक हैं, जबकि लड़कियां मात्र 3,031 हैं। इसके अलावा 35 वर्ष से अधिक उम्र के 7,025 से ज्यादा पुरुष अब भी अविवाहित हैं, जिनमें से 3,281 लोग 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं।

सीमांत जिलों में और गंभीर स्थिति

उत्तराखंड के सीमांत जिलों जैसे पिथौरागढ़ और चम्पावत में यह समस्या और भी गंभीर है। वहां लड़कियों की कमी के कारण कई परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए नेपाल तक का रुख कर रहे हैं। यह स्थिति राज्य में बिगड़ते लिंगानुपात को साफ दर्शाती है। यह समस्या केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। देहरादून में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी अकेले जीवन जीने को मजबूर हैं। आगे पढ़िए

आंकड़ों के अनुसार 60 से 80 वर्ष के बीच 5,714 पुरुष और 2,968 महिलाएं अकेले रह रही हैं। यह स्थिति सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों और नेताओं का मानना है कि लिंगानुपात के साथ-साथ बेरोजगारी भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। स्थायी रोजगार न होने के कारण कई युवा शादी करने से पीछे हट रहे हैं, जिससे यह संकट और गहराता जा रहा है।

लड़कियों की कम संख्या है समस्या

अक्सर यह कहा जाता है कि लड़कियां पहाड़ों में रहना नहीं चाहतीं, इसलिए शादियां नहीं हो रही हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। असली समस्या लड़कियों की कम संख्या है, जिससे विवाह में असंतुलन पैदा हो रहा है।


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