उत्तराखंड में सोलर प्रोजेक्ट पर सख्ती! 7 दिन में मीटर मीटर लगाना अनिवार्य.. वरना कार्रवाई तय
Uttarakhand Power Corporation Limited ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब प्रोजेक्ट पूरा होने के 7 दिनों के भीतर एनर्जी मीटर लगाना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
Apr 16 2026 11:53AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर सरकार और बिजली विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। Uttarakhand Power Corporation Limited ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सोलर प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यदि सात दिनों के भीतर एनर्जी मीटर नहीं लगाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सौर परियोजनाओं में देरी और लापरवाही को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
Uttarakhand Enforces Strict Solar Project Rules
यह निर्देश Uttarakhand Electricity Regulatory Commission द्वारा जारी सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नियमावली के तहत लागू किए गए हैं। नियमों के अनुसार, सोलर परियोजना का आवेदन पूरा होते ही सात दिनों के भीतर मीटर लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेना भी जरूरी कर दिया गया है। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
कॉमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) के नए मानक
नई व्यवस्था के तहत सोलर प्लांट की कॉमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) उसी दिन मानी जाएगी, जब मीटर लगने और आवश्यक क्लीयरेंस मिलने के बाद पहली बार बिजली ग्रिड में सप्लाई शुरू होगी। हालांकि, इसके लिए एक शर्त भी रखी गई है कि बिजली सप्लाई शुरू होने के 10 दिनों के भीतर प्लांट को अपनी क्षमता का कम से कम 75 प्रतिशत प्रदर्शन (परफॉर्मेंस रेशियो) दिखाना होगा।
पुराने नियमों पर काम करने वालों को चेतावनी
Uttarakhand Power Corporation Limited मुख्यालय को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ फील्ड यूनिट्स अभी भी अगस्त 2023 के पुराने नियमों के आधार पर काम कर रही हैं। इस पर मुख्य अभियंता (कॉमर्शियल) ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 27 नवंबर 2025 को जारी नए नियमों का ही पालन किया जाए। नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। आगे पढ़िए..
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के दिशा-निर्देश
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत बैटरी सिस्टम का जीवनकाल 12 वर्ष तय किया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। बैटरी प्रोजेक्ट्स के लिए 250 लाख रुपये प्रति मेगावाट-ऑवर की पूंजीगत लागत निर्धारित की गई है, जबकि नेट टैरिफ 5.78 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नए नियम
इन नए नियमों के लागू होने से सौर ऊर्जा परियोजनाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी। इससे न केवल बिजली उत्पादन में तेजी आएगी, बल्कि निवेशकों और उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। साथ ही उत्तराखंड में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और राज्य स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ेगा।
बिजली विभाग ने साफ कर दिया है कि अब सौर ऊर्जा परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को समय पर काम पूरा करने और नियमों का पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।