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Uttarakhand: होर्मुज से लौटा उत्तराखंड का जांबाज, कहा- सिर के ऊपर गुजरते थे ड्रोन, 65 रातें दहशत में कटी

रुड़की के कप्तान आशीष शर्मा 65 दिनों तक हार्मुज क्षेत्र में जहाज के साथ फंसे रहे। ड्रोन और मिसाइलों के बीच दहशत भरे हालात के बावजूद उन्होंने टीम को संभाला और सुरक्षित घर लौट आए।
May 7 2026 11:12AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

Strait of Hormuz के पास 65 दिनों तक फंसे रहे रुड़की के कप्तान आशीष शर्मा ने उन खतरनाक पलों को याद किया, जब हर समय जान का खतरा मंडरा रहा था। कभी जहाज के ऊपर से ड्रोन गुजरते थे, तो कभी तेज आवाज के साथ मिसाइलें आसमान चीरती हुई निकल जाती थीं। आसपास होने वाले धमाकों से जहाज तक हिल जाता था और रातें दहशत में गुजरती थीं।

Uttarakhand's brave captain returns from Hormuz

कप्तान आशीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने 18 जनवरी को जहाज की कमान संभाली थी और उन्हें तेल लेकर भारत लौटना था। जहाज जैसे ही हार्मुज के करीब पहुंचा, हालात बदल गए और तनाव के बीच जहाज को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। उन्होंने बताया कि करीब 50 किलोमीटर दूर एक जहाज पर हमला हुआ था, जिसकी तीव्रता का असर उनके जहाज तक महसूस हुआ। पानी में हुए विस्फोट से जहाज कांप उठा, जिससे कई रातें बिना सोए गुजारनी पड़ीं।

यूएई सरकार की सतर्कता से मिली सुरक्षा

हालात बिगड़ने पर United Arab Emirates सरकार ने सतर्कता बरतते हुए जहाज को बंदरगाह पर सुरक्षित खड़ा करवा दिया। वहां अग्निशमन समेत सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए, जिससे क्रू मेंबर सुरक्षित रह सके। शुरुआत में परिवार से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बना रहा, लेकिन सुरक्षा कारणों से बाद में कॉल बंद कर दी गई। इसके बाद कप्तान रोज सुबह-शाम “All OK” का मैसेज भेजकर परिवार को अपनी सुरक्षा की जानकारी देते थे। आगे पढ़िए..

कप्तान आशीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने 24 सदस्यीय दल को लगातार हौसला दिया। वे क्रू मेंबर से बातचीत करते और उनके परिवारों से भी संपर्क में रहते, ताकि सभी का मनोबल बना रहे। टीम में भारत, नाइजीरिया और श्रीलंका के सदस्य शामिल थे। स्थिति सामान्य होने पर 24 में से 12 सदस्यों को पहले भेजा गया। हाल ही में कप्तान समेत चार सदस्य दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे और फिर अपने घर लौटे। उनके घर पहुंचते ही परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल बन गया।

फीकी रही होली, अब लौटी खुशियां

कप्तान की पत्नी सरूनिका ने बताया कि इस बार होली उनके लिए फीकी रही, क्योंकि परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित था। बेटियां भी लगातार खबरें देखती रहती थीं और डर में थीं। हालांकि अब उनकी सुरक्षित वापसी से घर में फिर से खुशियां लौट आई हैं। कप्तान आशीष शर्मा की यह कहानी साहस, धैर्य और जिम्मेदारी का उदाहरण है। कठिन हालात में भी उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि पूरी टीम का मनोबल बनाए रखते हुए सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।


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