image: Forest Officer Emotional Farewell to Baby Elephant Malini

उत्तराखंड: रिटायरमेंट पर 9 माह की हथिनी 'मालिनी' ने गले लगाकर कहा अलविदा, छलक पड़े वन दारोगा के आंसू

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ एलीफेंट कैंप में सेवानिवृत्त वन दारोगा भारत सिंह रावत ने 9 माह की हथिनी मालिनी से विदाई लेते समय उसे गले लगाकर भावुक कर देने वाला दृश्य पेश किया। जानिए पूरी कहानी।
Jul 4 2026 8:06PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ एलीफेंट कैंप में आयोजित विदाई समारोह उस समय भावुक हो गया, जब सेवानिवृत्त वन दारोगा भारत सिंह रावत अपनी प्रिय हथिनी 'मालिनी' से विदा लेते समय उसके पैर छूकर गले लग गए और फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद वन अधिकारी, कर्मचारी और महावत भी भावुक हो गए।

Forest Officer's Emotional Farewell to Baby Elephant Malini

भारत सिंह रावत का मालिनी से रिश्ता केवल एक वन कर्मचारी और वन्यजीव का नहीं, बल्कि पिता और संतान जैसा बन चुका था। करीब 4 सितंबर 2025 को कोटद्वार की मालन नदी में 15 से 20 दिन की एक कमजोर और मरणासन्न हथिनी का बच्चा मिला था। वन विभाग की टीम ने उसका रेस्क्यू कर कालागढ़ एलीफेंट कैंप पहुंचाया। मालन नदी से मिलने के कारण उसका नाम 'मालिनी' रखा गया।

दिन-रात की देखभाल से बदली मालिनी की जिंदगी

19 फरवरी 2026 को वन मंत्री की मौजूदगी में मालिनी का विधिवत नामकरण किया गया। इसके बाद भारत सिंह रावत ने उसकी पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने समय पर दूध पिलाने, दवाइयां देने, संतुलित भोजन उपलब्ध कराने और नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। कैंप के कर्मचारियों को भी उन्होंने मालिनी की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए थे। वन क्षेत्राधिकारी के सहयोग से मालिनी के इलाज और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था लगातार की जाती रही।

85 किलो से बढ़कर 280 किलो पहुंचा वजन

जब मालिनी को रेस्क्यू कर कैंप लाया गया था, तब उसका वजन केवल 85 किलोग्राम था। लगातार देखभाल, बेहतर पोषण और चिकित्सकीय निगरानी के चलते अब उसका वजन बढ़कर लगभग 280 किलोग्राम हो चुका है। आगे पढ़िए..

वन विभाग के अनुसार यह बदलाव पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण को मिली सराहना

विदाई समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारत सिंह रावत की ईमानदारी, समर्पण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनके जुनून की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सिंह ने पूरे सेवाकाल में जंगल और वन्यजीवों की रक्षा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपना जीवन उद्देश्य माना।

अब रक्षित पांडेय संभालेंगे एलीफेंट कैंप की जिम्मेदारी

वर्तमान में कालागढ़ एलीफेंट कैंप में गजराज, लक्षमा, सावन और मालिनी सहित चार हाथियों की देखभाल की जा रही है। यहां तीन महावत, तीन चाराकटर और एक गेटकीपर तैनात हैं। सभी हाथियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पशु चिकित्सक द्वारा किया जाता है। भारत सिंह रावत की सेवानिवृत्ति के बाद अब रक्षित पांडेय एलीफेंट कैंप की जिम्मेदारी संभालेंगे।

निदेशक ने बताया क्यों बन जाता है इतना गहरा रिश्ता

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि वन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी लंबे समय तक किसी घायल या असहाय वन्यजीव की देखभाल करते हैं। ऐसे में उनके बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। उन्होंने कहा कि जब सेवा परिवर्तन या सेवानिवृत्ति के कारण ऐसे वन्यजीवों से अलग होना पड़ता है, तो वह पल बेहद भावुक होता है। यह रिश्ता केवल जिम्मेदारी का नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा, समर्पण और संवेदनाओं का होता है।


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