उत्तराखंड की डॉक्यूमेंट्री का लंदन इंडियन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में चयन, दुनिया देखेगी चिपको आंदोलन की कहानी
उत्तराखंड की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘This Tree Won’t Fall’ का चयन प्रतिष्ठित London Indian Film Festival के लिए हुआ है। फिल्म 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी और चिपको आंदोलन में महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।
Jul 13 2026 1:13PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ (This Tree Won’t Fall) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य की पर्यावरणीय विरासत और महिलाओं के संघर्ष को केंद्र में रखकर बनाई गई इस डॉक्यूमेंट्री का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है। फिल्म के माध्यम से 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी के साहस, संघर्ष और चिपको आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
Uttarakhand Documentary Selected for London Indian Film Festival
करीब चार वर्षों के शोध और निर्माण के बाद तैयार हुई यह डॉक्यूमेंट्री हिमालयी गांवों की उन महिलाओं की कहानी बयां करती है, जिन्होंने लगभग पांच दशक पहले जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपककर ऐतिहासिक चिपको आंदोलन को नई पहचान दिलाई थी। फिल्म में दिखाया गया है कि सीमित संसाधनों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जिस साहस और नेतृत्व का परिचय दिया, वह आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
सुदेशा देवी के संघर्ष को मिलेगी वैश्विक पहचान
डॉक्यूमेंट्री का केंद्र 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी हैं, जिन्होंने जंगलों को बचाने के लिए अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित किया। फिल्म उनके संघर्ष के माध्यम से यह संदेश देती है कि प्रकृति की रक्षा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है। आगे पढ़िए..
फिल्म के लेखक ने बताया फिल्म का उद्देश्य
फिल्म के लेखक दीपक रमोला ने कहा कि दुनिया के सबसे प्रभावशाली पर्यावरण आंदोलनों में से एक चिपको आंदोलन उन महिलाओं की बदौलत संभव हुआ, जिनका जीवन जंगलों से गहराई से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ ऐसी ही एक महिला की कहानी है, जिसने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए उन्हें गले लगाकर प्रकृति संरक्षण का अद्भुत उदाहरण पेश किया। उनके अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री महिलाओं की पर्यावरणीय समझ, नेतृत्व क्षमता और जमीनी संघर्ष को प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने लाती है।
इन लोगों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
फिल्म की कहानी दीपक रमोला और अपूर्वा बख्शी ने लिखी है। इसका निर्माण अपूर्वा बख्शी, दीपक रमोला और मनीषा त्यागराजन ने किया है। सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी ध्रुव वर्मा और सिद्धार्थ गोविंदन ने निभाई, जबकि संपादन अजीत नायर और ध्रुव वर्मा ने किया है। फिल्म का संगीत ताजदार जुनैद ने तैयार किया है।
19 जुलाई तक चलेगा लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल
लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में 19 जुलाई तक किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित मंच पर फिल्म का चयन उत्तराखंड, चिपको आंदोलन और सुदेशा देवी के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और महिला नेतृत्व पर आधारित यह डॉक्यूमेंट्री न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को दुनिया के सामने रखेगी, बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी सशक्त माध्यम बनेगी।