उत्तराखंड: 'अरबपति' BKTC को दानदाता का इंतजार! जर्जर पड़ा उत्तर भारत का इकलौता माता सीता मंदिर
चमोली के चाईं गांव स्थित माता सीता का प्राचीन मंदिर जर्जर हालत में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) से जल्द पुनर्निर्माण की मांग की है। फिलहाल माता सीता की प्रतिमा एक कमरे में स्थापित कर पूजा की जा रही है।
Jul 21 2026 6:47PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड स्थित चाईं गांव में माता सीता को समर्पित प्राचीन मंदिर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह उत्तर भारत का एकमात्र प्राचीन माता सीता मंदिर है। वर्षों पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब यहां नियमित पूजा-अर्चना भी संभव नहीं रह गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए माता सीता की प्रतिमा को मंदिर से हटाकर एक कमरे में स्थापित किया गया है, जहां वर्तमान में पूजा की जा रही है।
Villagers Demand Restoration of Ancient Sita Temple in Chamoli
ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधीन आता है। पिछले कई वर्षों से मंदिर की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है। इसके लिए कई बार लिखित और मौखिक रूप से समिति को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर संकट
ग्रामीणों के अनुसार यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की जर्जर स्थिति से लोगों में चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द संरक्षण कार्य शुरू नहीं हुआ तो इस ऐतिहासिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने भी जताई चिंता
उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि BKTC ने पहले कई अन्य मंदिरों के निर्माण और पुनर्निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराया है, लेकिन अपने ही अधीनस्थ इस महत्वपूर्ण माता सीता मंदिर की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने समिति से जल्द पुनर्निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की। आगे पढ़िए..
तीन साल से भेजे जा रहे पत्र
चाईं गांव के ग्राम प्रधान शंकर लाल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से मंदिर की जर्जर स्थिति की जानकारी लगातार समिति को दी जा रही है। कई बार पत्र लिखे गए और अधिकारियों को मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के कारण माता सीता की प्रतिमा को अस्थायी रूप से एक कमरे में स्थापित करना पड़ा है।
ग्रामीण बोले—जरूरत पड़ी तो खुद बनाएंगे मंदिर
ग्राम प्रधान ने कहा कि यदि BKTC किसी कारणवश मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं कर पाती और अपनी जिम्मेदारी छोड़ देती है, तो ग्रामीण जनसहयोग और अपने संसाधनों से मंदिर का निर्माण कराने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर को किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।
कई दानदाता भी निर्माण को तैयार
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि माता सीता का यह मंदिर समिति के अधीन 45 मंदिरों की सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि कई दानदाता मंदिर निर्माण के लिए आगे आ चुके हैं और समिति से संपर्क भी कर चुके हैं। ग्रामीणों की मांग लंबे समय से लंबित है, जिस पर विचार किया जा रहा है।
₹127 करोड़ के बजट के बीच उठे सवाल
गौरतलब है कि BKTC ने वर्ष 2025-26 के लिए लगभग ₹127 करोड़ का वार्षिक बजट स्वीकृत किया था। यह बजट मुख्य रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा व्यवस्थाओं, रखरखाव और मंदिरों की नियमित पूजन सामग्री पर खर्च किया जाता है। वहीं, यात्रा सीजन में समिति को चढ़ावे के रूप में हर वर्ष लगभग ₹80 से ₹85 करोड़ की आय होने का अनुमान है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि इतने बड़े बजट के बावजूद माता सीता के इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण पर अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया गया।