रुद्रप्रयाग: तुंगनाथ हाईवे पर भूस्खलन, पहाड़ी से गिरीं विशाल चट्टानें.. कुंड-चोपता मार्ग बंद
Rudraprayag News: लगातार बारिश के बीच तुंगनाथ धाम को जोड़ने वाले एनएच-107ए पर ताला क्षेत्र के पास पहाड़ी से विशाल चट्टानें गिरने से हाईवे बंद हो गया। प्रशासन मलबा हटाने में जुटा है और यात्रियों से फिलहाल यात्रा टालने की अपील की गई है।
Jul 31 2026 8:37PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच विश्व प्रसिद्ध तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम को जोड़ने वाले एनएच-107ए (कुंड–चोपता–गोपेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग) पर शुक्रवार को बड़ा हादसा टल गया। ताला क्षेत्र के आगे अचानक पहाड़ी का एक हिस्सा भरभराकर टूट गया और विशाल चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
Tungnath Highway Blocked After Massive Landslide
राहत की बात यह रही कि जिस समय चट्टानें सड़क पर गिरीं, उस समय वहां से कोई वाहन या यात्री नहीं गुजर रहा था। यदि कुछ सेकंड का भी अंतर होता, तो बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे कई लोगों की जान बचाने वाला चमत्कार बताया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पहाड़ी से भारी चट्टानों के तेज आवाज के साथ सड़क पर गिरने और पूरे मार्ग के मलबे से पट जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। आगे पढ़िए..
युद्धस्तर पर मलबा हटाने का काम शुरू
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क से मलबा और बड़ी चट्टानों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, ताकि जल्द से जल्द मार्ग को यातायात के लिए खोला जा सके।
लगातार बारिश से बढ़ा भूस्खलन का खतरा
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि लगातार बारिश के कारण जिले के कई स्थानों पर भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताला के आगे एनएच-107ए पर चट्टान गिरने से मार्ग बाधित हुआ है और संबंधित एजेंसियां मार्ग खोलने के कार्य में जुटी हैं।
यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी
मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें।
केवल प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करें।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन खड़ा न करें।
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें।
लगातार सक्रिय हो रहे भूस्खलन जोन एक बार फिर यह संकेत दे रहे हैं कि मानसून के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।