उत्तराखंड: गोविंद बल्लभ पंत ने यहां से शुरू किया था विकास, फावड़ा चला कर खोद डाली नहर.. जानिए स्वर्णिम गाथा
Uttarakhand News: 1952 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पं. गोविंद बल्लभ पंत गरुड़ पहुंचे थे। दर्शानी में फावड़ा उठाकर भेटा नहर की शुरुआत की और गड़सेर में विकासखंड की नींव रखी। जानिए उनकी ऐतिहासिक विरासत।
Sep 10 2026 12:05PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
वर्ष 1952 में भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में गरुड़ पहुंचे थे। उस दौर में उन्होंने क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्य आज भी स्थानीय लोगों के लिए ऐतिहासिक धरोहर और पुरानी विकास सोच की यादगार बने हुए हैं। कौसानी से गरुड़ की ओर आते समय पं. पंत का काफिला अचानक दर्शानी में रुक गया। यहां उन्होंने खुद हाथ में फावड़ा उठाया और भेटा नहर के निर्माण की शुरुआत की।
Govind Ballabh Pant’s Historic Visit to Garur in 1952
दर्शानी में पं. पंत ने केवल अधिकारियों को निर्देश नहीं दिए, बल्कि खुद फावड़ा उठाकर नहर निर्माण की शुरुआत की थी। इसी दौरान उन्होंने यहां एक विद्यालय की नींव भी रखी। वक्त के साथ भेटा नहर अब जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच चुकी है। स्थानीय स्तर पर इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग इस विरासत को अपेक्षित रूप से संरक्षित नहीं कर पाया।
प्राथमिक विद्यालय भी बदहाल
पं. पंत से जुड़ी एक अन्य यादगार धरोहर राजकीय प्राथमिक विद्यालय दर्शानी भी अब बदहाली का सामना कर रहा है। विद्यालय में छात्र संख्या लगातार कम हो रही है और भवन भी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। एक ओर यह स्थान पं. पंत के ऐतिहासिक योगदान की याद ]दिलाता है, वहीं दूसरी ओर इसकी वर्तमान स्थिति संरक्षण की जरूरत को उजागर करती है।
गड़सेर में रखा था विकासखंड की नींव
दर्शानी के बाद पं. गोविंद बल्लभ पंत गड़सेर गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने तत्कालीन अल्मोड़ा जिले के पहले विकासखंड गरुड़ का शिलान्यास किया। समय के साथ गरुड़ विकासखंड ने काफी विस्तार किया और आज यह क्षेत्र एक बड़े विकासखंड का रूप ले चुका है। पुराने भवन का जीर्णोद्धार कर नया भवन बनाया गया है। स्थानीय लोग आज भी इसे पं. पंत की विकास विरासत से जोड़कर देखते हैं। सरकार की ओर से नए भवन में रंगरोगन कर इसका संरक्षण किया गया है। वर्ष 2022 में यहां नए स्वरूप में विकासखंड सभागार का भी निर्माण किया गया। आगे पढ़िए..
बुजुर्ग आज भी याद करते हैं पं. पंत के विकास कार्य
उस दौर को देखने वाले बुजुर्ग आज भी पं. पंत के गरुड़ दौरे और उनके विकास कार्यों को याद करते हैं। उनके लिए यह केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि उस समय के नेतृत्व और पहाड़ के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण स्मृति है। पं. पंत का लोगों से सीधा संवाद और स्थानीय भाषा में बात करना भी आज तक चर्चा में रहता है।
जब पं. पंत ने लोगों को भाबर में बसने का दिया था सुझाव
बताया जाता है कि पं. गोविंद बल्लभ पंत ने कुमाउनी में भाषण देते हुए स्थानीय लोगों से कहा था— “हिटो तुम लोगों कै भाबर में जमीन दिनु। भाबर में बसि जाओ।” अर्थात, उन्होंने लोगों को भाबर क्षेत्र में जमीन देने और वहां बसने का सुझाव दिया था। उस समय लोगों ने जवाब दिया था— “नाई हारि भाबर में भौत मच्छर लागनी।” यानी भाबर में बहुत मच्छर लगते हैं।
आज पहाड़ के लोग याद करते हैं वह पुरानी बात
दशकों बाद पहाड़ के बदलते हालात में यह पुरानी बात एक बार फिर चर्चा में आती है। आज पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते जंगली जानवरों के आतंक और खेती से जुड़ी चुनौतियों से परेशान कई लोग कहते हैं कि यदि उस समय भाबर में बस गए होते तो शायद आज वहां आराम से खेती कर रहे होते। पं. पंत के उस दौर के विकास कार्य और उनके द्वारा कही गई बातें आज भी गरुड़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं।
विकास की धरोहरों को संरक्षण की जरूरत
गरुड़ में पं. गोविंद बल्लभ पंत से जुड़ी नहर, विद्यालय और विकासखंड जैसी धरोहरें उत्तराखंड के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें से कुछ का संरक्षण किया गया है, जबकि कुछ आज बदहाल स्थिति में हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि पं. पंत से जुड़ी इन ऐतिहासिक धरोहरों को केवल पुराने निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास और विकास यात्रा की महत्वपूर्ण निशानी के तौर पर संरक्षित किया जाना चाहिए।