रुद्रप्रयाग में खुलेगा वेद महाविद्यालय, संसारी में 22 नाली जमीन चयनित; गुरुकुल की तर्ज पर होगी पढ़ाई
केंद्र सरकार की चारधाम चार वेद महाविद्यालय योजना के तहत उत्तराखंड में प्रस्तावित वेद महाविद्यालय के लिए रुद्रप्रयाग के संसारी में 22 नाली भूमि का चयन किया गया है। महाविद्यालय में वेद, उपनिषद और धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा गुरुकुल की तर्ज पर दी जाने की
Sep 16 2026 5:56PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में वेद शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित होने जा रहा है। केंद्र सरकार की चारधाम चार वेद महाविद्यालय योजना के तहत उत्तराखंड में प्रस्तावित वेद महाविद्यालय के लिए संसारी क्षेत्र में 22 नाली भूमि का चयन कर लिया गया है।
Vedic College to Be Established in Rudraprayag, 22 Nali Land Selected
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बोर्ड बैठक में भूमि चयन से संबंधित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई है। अब संस्कृत शिक्षा विभाग इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में जुट गया है।
संसारी में मिली 22 नाली जमीन
वेद महाविद्यालय के लिए बीकेटीसी ने पहले राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में भूमि की तलाश की थी। चमोली जिले के मंडल और सिमली क्षेत्रों में भी जमीन की संभावनाएं तलाशी गईं, लेकिन वहां महाविद्यालय के मानकों के अनुरूप पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद अन्य विकल्पों पर विचार किया गया और अंततः रुद्रप्रयाग के संसारी क्षेत्र में बीकेटीसी के स्वामित्व वाली 22 नाली भूमि का चयन किया गया।भूमि चयन के प्रस्ताव को मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में रखा गया, जहां चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
वेद-उपनिषद और पुराणों की होगी पढ़ाई
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में वेद महाविद्यालय की स्थापना केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। उनके अनुसार, संस्थान के निर्माण और संचालन से प्रदेश और देश के युवाओं को वेद, उपनिषद और पुराणों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। महाविद्यालय में विद्यार्थियों को वेदों, ऋचाओं, उपनिषदों और पुराणों का व्यवस्थित एवं विस्तृत अध्ययन कराने की योजना है।
गुरुकुल की तर्ज पर रहकर पढ़ाई की योजना
प्रस्तावित वेद महाविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को गुरुकुल प्रणाली की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके तहत विद्यार्थियों को परिसर में रहकर अध्ययन करना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देने के बजाय विद्यार्थियों को वैदिक अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।
परिसर में मोबाइल इस्तेमाल पर प्रतिबंध
प्रस्तावित महाविद्यालय की व्यवस्था में एक खास प्रावधान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़ा है। बताया गया है कि प्रवेश संबंधी शर्तों में परिसर में मोबाइल के उपयोग पर रोक का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन और गुरुकुल जैसी जीवनशैली पर केंद्रित रखना बताया जा रहा है।
पहले से मौजूद है आदर्श वेद विद्यालय की व्यवस्था
केंद्र सरकार ने देश में वेद शिक्षा को संस्थागत स्वरूप देने के लिए आदर्श वेद महाविद्यालयों की व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई है। उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान इस क्षेत्र की प्रमुख संस्था है। योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों का चयन किया गया है। इसमें उत्तर क्षेत्र के लिए बदरीनाथ क्षेत्र, पूर्व के लिए पुरी, दक्षिण के लिए शृंगेरी और पश्चिम क्षेत्र के लिए द्वारका का उल्लेख किया गया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गुवाहाटी को चुने जाने की बात भी योजना में शामिल है।
भवन और पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर काम
भूमि चयन के बाद अब परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। संस्कृत शिक्षा विभाग और मंदिर समिति की ओर से भवन निर्माण, सुविधाओं, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सत्र से संबंधित रूपरेखा तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के स्तर पर भी इस तरह के संस्थान में वैदिक शिक्षा की आधुनिक आवश्यकताओं के साथ व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाएगा।
उत्तराखंड में वैदिक शिक्षा को मिलेगा नया केंद्र
रुद्रप्रयाग में प्रस्तावित वेद महाविद्यालय से उत्तराखंड में वैदिक एवं संस्कृत शिक्षा के लिए एक नया संस्थागत केंद्र विकसित होने की उम्मीद है। संसारी में भूमि चयन के बाद अब परियोजना की अगली प्रक्रियाओं पर फोकस रहेगा। महाविद्यालय शुरू होने के बाद यहां उत्तराखंड के साथ देश के अन्य हिस्सों से भी विद्यार्थी वैदिक अध्ययन के लिए पहुंच सकेंगे।