उत्तराखंड: प्राकृतिक आवास में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी, बुग्यालों से सड़कों तक पहुंच रहे हिमालयन थार
चमोली-रुद्रप्रयाग के बुग्यालों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और लोगों द्वारा भोजन देने से हिमालयन थार के व्यवहार व आवास पर असर पड़ रहा है। वन विभाग अब स्वच्छता अभियान, जागरूकता और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के जरिए थार के संरक्षण पर जोर देगा।
Oct 2 2026 2:08PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
चमोली और रुद्रप्रयाग में फैले केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में बढ़ती मानवीय गतिविधियों का असर हिमालयन थार के प्राकृतिक आवास और व्यवहार पर पड़ रहा है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों द्वारा थार को भोजन देने तथा बुग्यालों में बढ़ते कूड़े के कारण वन्यजीव अब आबादी और सड़कों के आसपास भी पहुंच रहे हैं। इसे रोकने के लिए वन विभाग ने मानवीय हस्तक्षेप कम करने और जागरूकता बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की
Himalayan Tahr Habitat Under Threat in Chamoli
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में करीब 975 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यहां बड़ी संख्या में हिमालयन थार बुग्यालों और पहाड़ी क्षेत्रों में विचरण करते हैं। यह क्षेत्र थार के प्राकृतिक आवास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बढ़ने से वन्यजीवों के सामने नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
लोगों के खाना देने से बदल रहा थार का व्यवहार
वन विभाग के सर्वेक्षण में सामने आया कि अभयारण्य क्षेत्र में पहुंचने वाले कुछ पर्यटक, तीर्थयात्री और स्थानीय लोग हिमालयन थार को खाने की वस्तुएं देते हैं। इससे थार भोजन की तलाश में अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर सड़कों और आबादी वाले इलाकों की ओर आने लगे हैं। प्राकृतिक रूप से मिलने वाले भोजन के बजाय इंसानों से मिलने वाले भोजन की ओर आकर्षित होने से उनके व्यवहार और जीवनशैली में बदलाव की चिंता वन विभाग ने जताई है।
कूड़े के कारण निचले इलाकों में भी बढ़ी आवाजाही
अभयारण्य के आसपास कई स्थानों पर कूड़ा जमा होने से भी वन्यजीव प्रभावित हो रहे हैं। चोपता, सारी, कांचुलाखर्क, सौखर्क और मंडल जैसे निचले क्षेत्रों में हिमालयन थार की आवाजाही बढ़ने की बात सामने आई है। आगे पढ़िए..
वन विभाग का मानना है कि भोजन और कूड़े की उपलब्धता वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर आने के लिए आकर्षित कर रही है। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ने की संभावना भी रहती है।
बुग्यालों में कम किया जाएगा मानवीय हस्तक्षेप
हिमालयन थार के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने नई संरक्षण कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत बुग्यालों और अभयारण्य क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा अभयारण्य क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा, ताकि वन्यजीवों को कूड़े और मानव खाद्य सामग्री की ओर आकर्षित होने से रोका जा सके।
साइन बोर्ड और जागरूकता अभियान पर जोर
वन विभाग की ओर से अलग-अलग स्थानों पर साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को वन्यजीवों को भोजन नहीं देने के लिए जागरूक किया जाएगा। वन्यजीव और वनस्पतियों के संरक्षण को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि वन्यजीवों को प्राकृतिक तरीके से ही अपने आवास में रहने दिया जाए।
प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखना जरूरी
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के अनुसार, हिमालयन थार के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उनके मुताबिक प्राकृतिक आवासों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वन्यजीवों की प्रवृत्ति में बदलाव आ रहा है। विभाग अब थार के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने के साथ मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करने और लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने की दिशा में काम करेगा।