उत्तराखंड: हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा सायरन, जानें क्यों लिया गया फैसला
उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की नियमित जांच के लिए अब हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन टेस्ट किया जाएगा। इस दौरान बजने वाला सायरन किसी वास्तविक भूकंप का अलर्ट नहीं होगा...
Oct 8 2026 7:32PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड में भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था शुरू की है। अब प्रदेश में हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के सायरन का परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान अगर लोगों को सायरन की आवाज सुनाई देती है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं होगी। यह पहले से निर्धारित सिस्टम टेस्ट होगा।
Uttarakhand to Test Earthquake Sirens on the 9th of Every Month
सायरन टेस्ट का मुख्य उद्देश्य भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के सेंसर और सायरन की तकनीकी स्थिति जांचना है। इसके साथ ही आम लोगों को यह समझाना भी है कि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी मिलने पर सायरन की आवाज कैसी होगी। नियमित टेस्टिंग से लोगों में सायरन को लेकर भ्रम और घबराहट कम होगी तथा वास्तविक आपदा के समय वे तेजी से प्रतिक्रिया कर सकेंगे।
169 सेंसर और 112 सायरन से हो रही निगरानी
वर्तमान में उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं। इन सेंसर के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है। भूकंप की स्थिति में सिस्टम संबंधित क्षेत्रों तक जल्द से जल्द चेतावनी पहुंचाने का प्रयास करता है। यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से इस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी चल रहा है।
मुख्य सचिव ने दिए नियमित जांच के निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रबंधन विभाग को सेंसर और सायरन की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। ऐसे में आपदा से पहले जागरूकता, तैयारी और समय पर चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है।
6 अक्टूबर के भूकंप में सिस्टम ने किया काम
6 अक्टूबर 2026 की रात चमोली जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। दी गई जानकारी के अनुसार, थराली के पास आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली ने काम किया। भूदेव मोबाइल ऐप और लगाए गए सायरन के माध्यम से लोगों को चेतावनी दी गई। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
कुछ सेकंड की चेतावनी से बच सकती है जान
भूकंप आने से पहले मिलने वाले कुछ सेकंड लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस दौरान लोग सुरक्षित स्थान पर जाने के साथ गैस और बिजली के उपकरण बंद कर सकते हैं और जरूरी सावधानी बरत सकते हैं। 6 अक्टूबर की घटना को भी इस चेतावनी प्रणाली की उपयोगिता के उदाहरण के तौर पर देखा गया है।
मोबाइल पर भी मिलेगा टेस्ट अलर्ट
सिर्फ सायरन ही नहीं, बल्कि हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूदेव मोबाइल ऐप पर भी टेस्ट अलर्ट भेजा जाएगा। मोबाइल पर वाइब्रेशन और बीप की आवाज के जरिए चेतावनी संकेत मिलेगा। यूएसडीएमए ने लोगों से भूदेव और सचेत ऐप का अपडेटेड वर्जन मोबाइल में रखने और दोनों ऐप को लोकेशन की अनुमति देने की अपील की है, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी समय पर मोबाइल तक पहुंच सके।
9 तारीख को सायरन बजे तो न घबराएं
यूएसडीएमए ने स्पष्ट किया है कि हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजने वाला सायरन वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं होगा। यह पहले से तय सिस्टम टेस्ट का हिस्सा होगा। लोगों से अपील की गई है कि वे परिवार के सदस्यों, बच्चों और बुजुर्गों को भी इस टेस्ट के बारे में जानकारी दें। साथ ही भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने के तरीकों को समझें और मॉक ड्रिल में सक्रिय रूप से हिस्सा लें।