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उत्तराखंड में गर्म पानी के कुंडों से बढ़ेगा पर्यटन, मदकोट में बनेगा जियोथर्मल पूल; मिलेंगे रोजगार के अवसर

उत्तराखंड में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी है। पिथौरागढ़ के मदकोट में जियोथर्मल पूल, कॉटेज और स्नान सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
Oct 9 2026 12:37PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत यानी जियोथर्मल स्प्रिंग्स अब पर्यटन विकास की नई पहचान बन सकते हैं। राज्य सरकार इन स्रोतों के जरिए बिजली उत्पादन की संभावनाओं पर काम कर रही है, वहीं पर्यटन विभाग इन्हें पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की योजना तैयार कर रहा है। इसी कड़ी में पिथौरागढ़ जिले के मदकोट में जियोथर्मल पूल विकसित करने की योजना है। इसके तहत प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत के आसपास स्नान की सुविधा, पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज और अन्य सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।

Uttarakhand Plans Geothermal Pools to Boost Tourism

पर्यटन विभाग की योजना के तहत मदकोट में गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत का इस्तेमाल पर्यटकों को स्नान की सुविधा देने के लिए किया जाएगा। यहां ठहरने के लिए कॉटेज और अन्य पर्यटक सुविधाएं भी विकसित करने की तैयारी है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान स्थल बनाने की योजना है। परियोजना शुरू करने से पहले गर्म पानी की जांच और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की मदद लेने की भी योजना है। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तरह की सुविधाओं से नए पर्यटन स्थल विकसित होंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

उत्तराखंड में चिह्नित किए गए 40 जियोथर्मल स्प्रिंग्स

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर कुमार तिवारी के अनुसार, अध्ययन में उत्तराखंड में 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स चिह्नित किए गए हैं। राज्य में इनके अलावा भी कुछ प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत मौजूद हैं, जिन्हें अभी चिह्नित नहीं किया गया है। कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में गोरी नदी के आसपास करीब 13 किलोमीटर लंबी जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 10 गर्म पानी के स्रोत हैं, जिनका अलग-अलग जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन स्रोतों को पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर राज्य के नए पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। यदि मदकोट की योजना सफल रहती है, तो दूसरे उपयुक्त स्थानों पर भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। आगे पढ़िए..

बिजली से लेकर ग्रीनहाउस तक, गर्म पानी के कई उपयोग

जियोथर्मल स्प्रिंग्स का उपयोग केवल पर्यटकों को स्नान कराने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों से कई क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावनाएं हैं।
बिजली उत्पादन: भू-तापीय ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है।
घरेलू हीटिंग: ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में घरों, होटलों और धर्मशालाओं को गर्म रखने में मदद मिल सकती है।
ग्रीनहाउस खेती: गर्मी की मदद से सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कृषि और मछली पालन: उपयुक्त परिस्थितियों में गर्म पानी का उपयोग कृषि और एक्वाकल्चर में किया जा सकता है।
स्पा और वेलनेस पर्यटन: गर्म पानी के कुंडों के आसपास स्नान और स्पा जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
स्थानीय रोजगार: होटल, होमस्टे, खान-पान, गाइड सेवाओं और स्थानीय परिवहन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, गर्म पानी के औषधीय लाभों का दावा करने से पहले उसकी रासायनिक संरचना और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।

बदरीनाथ के तप्त कुंड का भी दिया उदाहरण

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बदरीनाथ धाम के पास स्थित तप्त कुंड का उदाहरण देते हुए कहा कि पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालु वहां स्नान करते हैं और उन्हें थकान से राहत महसूस होती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी से स्नान की सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसी तरह उत्तराखंड में मौजूद प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों को पर्यटन से जोड़कर पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताई योजना

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के मुताबिक, राज्य में नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से पिथौरागढ़ के मदकोट में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सुविधाओं में कॉटेज, ठहरने की व्यवस्था और गर्म पानी से स्नान की सुविधा शामिल है। परियोजना शुरू करने से पहले पानी की जांच और सुरक्षा के सभी पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा। इस योजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। होटल, होमस्टे, खान-पान और परिवहन जैसी गतिविधियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

जियोथर्मल स्प्रिंग्स से बढ़ सकती है उत्तराखंड की पर्यटन क्षमता

उत्तराखंड में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। मदकोट में प्रस्तावित जियोथर्मल पूल की योजना इसी दिशा में एक पहल है। यदि परियोजना सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित होती है, तो इससे पिथौरागढ़ को एक नए पर्यटन आकर्षण के रूप में पहचान मिल सकती है।


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