उत्तराखंड के ताराकुंड महादेव मंदिर को मिलेगी नई पहचान? झील का होगा सौंदर्यीकरण, बनेगा धार्मिक पर्यटन सर्किट
पौड़ी जिले के प्राचीन ताराकुंड महादेव मंदिर और प्राकृतिक झील को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने मंदिर निर्माण, झील के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करने का भरोसा
Oct 15 2026 6:13PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, जहां प्राचीन मंदिरों और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े अनेक स्थल मौजूद हैं। इन्हीं में पौड़ी जिले के पैठाणी क्षेत्र में स्थित ताराकुंड भी शामिल है। प्राकृतिक झील, चारों ओर फैली हरियाली और प्राचीन मंदिर के कारण यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास महत्व रखता है। अब ताराकुंड को धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है। कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने सैकड़ों ग्रामीणों के साथ पदयात्रा कर यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने स्थल के विकास और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की बात कही।
Tarakund Temple to Get a New Identity as a Tourist Destination
पौड़ी जिले में समुद्र तल से करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ताराकुंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। पहाड़ों, जंगलों और हरियाली के बीच मौजूद झील यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करती है। शहरों की भीड़भाड़ से दूर होने के कारण यह स्थान धार्मिक यात्रियों, प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए संभावनाएं रखता है। हालांकि, यहां तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ते का सहारा लेना पड़ता है, जिसके चलते अब तक यह बड़े पर्यटन स्थलों की तरह लोकप्रिय नहीं हो पाया है।
कैसे पहुंचें ताराकुंड महादेव मंदिर?
ताराकुंड पौड़ी जिले के पैठाणी क्षेत्र में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए पौड़ी से सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पौड़ी से पैठाणी क्षेत्र की ओर करीब 44 किलोमीटर सड़क यात्रा के बाद लगभग पांच किलोमीटर का पैदल ट्रेक तय करना पड़ता है। बड़ेथ गांव की ओर से भी यहां पहुंचने का मार्ग बताया जाता है। पैठाणी के आसपास के क्षेत्रों से होकर भी पैदल रास्ते इस्तेमाल किए जाते हैं। मार्ग के अनुसार, करीब एक घंटे की ट्रेकिंग के बाद ताराकुंड पहुंचा जा सकता है। यदि सुरक्षित पैदल मार्ग, उचित संकेतक और बेहतर संपर्क सुविधाएं विकसित होती हैं, तो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां पहुंचना आसान हो सकता है।
तीज और शिवरात्रि पर पहुंचते हैं श्रद्धालु
ताराकुंड स्थानीय लोगों की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय निवासी कुलदीप रावत के अनुसार, तीज के अवसर पर लोग यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वहीं, शिवरात्रि के दौरान भगवान शिव की पूजा करने के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। झील और मंदिर के आसपास का शांत वातावरण इस स्थान को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए खास बनाता है। स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं का संरक्षण करते हुए इसका विकास किया जाए, तो ताराकुंड को धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति से जुड़े स्थल के रूप में भी पहचान मिल सकती है।
मां तारा के मंदिर निर्माण और झील के सौंदर्यीकरण की योजना
ताराकुंड पहुंचने के बाद कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने मां तारा के भव्य मंदिर निर्माण, झील के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने की बात कही। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस पौराणिक स्थल के विकास के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, प्रस्तावित योजनाओं के धरातल पर उतरने के लिए संबंधित प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों का पूरा होना जरूरी होगा।
बुंखाल से धारी देवी तक धार्मिक पर्यटन सर्किट की पहल
ताराकुंड को आसपास के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से जोड़कर एक व्यापक तीर्थाटन सर्किट विकसित करने की योजना पर भी काम करने की बात कही गई है। प्रस्तावित धार्मिक सर्किट में बुंखाल मंदिर, पैठाणी स्थित राहु मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, देवलगढ़ स्थित राजराजेश्वरी देवी मंदिर, कमलेश्वर महादेव मंदिर और मां धारी देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को शामिल करने की पहल की जाएगी। इन धार्मिक स्थलों के बीच बेहतर सड़क संपर्क, सूचना संकेतक और यात्री सुविधाएं विकसित होने से श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में कई मंदिरों के दर्शन करने का अवसर मिल सकता है।
सड़क, विश्राम गृह और ध्यान केंद्र की मांग
ताराकुंड मंदिर परिसर में आयोजित चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास से जुड़ी समस्याएं और सुझाव रखे। उनकी प्रमुख मांगों में सड़क संपर्क बेहतर करना, झील का सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल रहा। ग्रामीणों ने विश्राम गृह, ध्यान केंद्र, सुरक्षित पैदल मार्ग, बैठने की व्यवस्था और पेयजल जैसी सुविधाएं विकसित करने की मांग भी उठाई। मंत्री धन सिंह रावत ने इन मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मिल सकता है रोजगार
ताराकुंड को पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिलने से आसपास के गांवों को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, वाहन सेवा, होमस्टे और भोजनालय जैसे रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और पलायन की चुनौती से निपटने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, पर्यटन विकास के साथ झील, जंगलों और प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण भी जरूरी होगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ताराकुंड के विकास के लिए प्रस्तावित योजनाएं कब स्वीकृत होती हैं और उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।