image: Uttarakhand Offers Up to 63 Lakh Subsidy for Poultry Farms

उत्तराखंड में पोल्ट्री फार्म खोलने पर मिलेगी 63 लाख रुपये तक सब्सिडी, जानें पूरी योजना

उत्तराखंड की कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने पर 63 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। राज्य में वर्ष 2030 तक 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
Oct 26 2026 9:23AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड में पोल्ट्री कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने वाले उद्यमियों को 63 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में पोल्ट्री व्यवसाय को बढ़ावा देना, निवेश के नए अवसर पैदा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना है। नीति के तहत मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 30 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में 40 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में कुल 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

Uttarakhand Offers Up to ₹63 Lakh Subsidy for Poultry Farms

कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में व्यावसायिक लेयर फार्म तथा ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित किए जा सकेंगे। मैदानी क्षेत्रों में 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म के लिए परियोजना लागत 1.80 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस पर अधिकतम 54 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों में 15 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म के लिए 48 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है।
ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित करने वाले उद्यमियों को भी योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। मैदानी क्षेत्रों में 10 हजार पक्षियों की क्षमता वाले ब्रायलर पैरेंट फार्म की परियोजना लागत 2.10 करोड़ रुपये निर्धारित है, जिस पर अधिकतम 63 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। इसी तरह पर्वतीय क्षेत्रों में पांच हजार पक्षियों की क्षमता वाले ब्रायलर पैरेंट फार्म के लिए 1.40 करोड़ रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है। इस पर 56 लाख रुपये तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।

पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए जमीन होना जरूरी

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास उत्तराखंड में भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। यदि आवेदक के पास अपनी जमीन नहीं है, तो कम से कम 10 वर्ष का पंजीकृत पट्टा समझौता होना अनिवार्य है। इसके साथ ही संबंधित भूमि विवादग्रस्त नहीं होनी चाहिए। आवेदन के समय बैंक का सहमति पत्र भी जमा करना होगा। इन शर्तों का उद्देश्य परियोजनाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार स्थापित करना और उनके संचालन के लिए जरूरी वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करना है। आगे पढ़िए..

कौन कर सकता है आवेदन?

कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत आवेदन करने के लिए उत्तराखंड का अधिवासी होना अनिवार्य नहीं है। भारतीय नागरिकों, अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई और अन्य देशों के उद्यमियों को भी नीति के तहत आवेदन करने की पात्रता दी गई है। इसके अलावा, व्यक्तिगत आवेदक, साझेदारी फर्म, कंपनियां और स्टार्टअप भी व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक आवेदकों को निर्धारित शर्तें पूरी करने के साथ आवश्यक दस्तावेज और बैंक का सहमति पत्र प्रस्तुत करना होगा।

पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगी मंजूरी

मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य में कुल 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 26 इकाइयां मैदानी क्षेत्रों में और 28 इकाइयां पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। परियोजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। हालांकि, अनुदान की स्वीकृति संबंधित बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। ऐसे में इच्छुक उद्यमियों को आवेदन से पहले पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जुटाने की सलाह दी जाती है।

छोटी पोल्ट्री इकाइयों को भी मिल सकता है लाभ

नीति के तहत निर्धारित क्षमता से छोटी पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने वाले उद्यमी एमएसएमई नीति के अंतर्गत उपलब्ध लाभ ले सकते हैं। इससे छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को भी अवसर मिल सकता है। इसके अलावा, पोल्ट्री व्यवसाय में उन्नत तकनीक अपनाने वाले उद्यमियों को नवाचार प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है। इससे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पोल्ट्री उत्पादन को बेहतर बनाने के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

स्वरोजगार और पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी

उत्तराखंड की कुक्कुट विकास नीति-2025 को प्रदेश में पोल्ट्री कारोबार के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य व्यावसायिक पोल्ट्री इकाइयों की स्थापना के जरिए निवेश को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुदान प्रतिशत निर्धारित किए जाने से दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों को प्रोत्साहन देने की कोशिश की गई है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोगों को आवेदन करने से पहले संबंधित पशुपालन विभाग से पात्रता, स्वीकृत परियोजना लागत और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।


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