गढ़वाल: भारी बारिश के बाद गदेरे में बनी झील, दो गांवों पर मंडराया खतरा..मकानों में दरारें
25 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी झील बनने के कारण भविष्य में बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को इसकी सूचना दे दी है-
Jul 25 2021 2:55PM, Writer:अनुष्का ढौंडियाल
बरसात के सुहावने मौसम का आनंद केवल वे लोग ही उठा सकते हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से कोसों दूर हैं। पहाड़ों पर बरसात अधिकांश बार आपदाओं को निमंत्रण ही देती है। वर्तमान में मॉनसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो रखा है और उसका खामियाजा पहाड़ी क्षेत्र में रह रहे लोगों को भुगतना पड़ रहा है पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बरसात के कारण उत्तराखंड में हाल बेहाल हो रखे हैं। जगह-जगह दुर्घटनाएं हो रही हैं। जलस्तर बढ़ने से नदियां और नाले उफान पर आ रखे हैं। पानी आफत बनकर पहाड़ों में बरस रहा है। चमोली जिले के नारायण बगड़ में भी कुछ ऐसा ही हाल हो रहा है। नारायणबगड़ के गड़कोट और अंगोठ गांव के लोग बरसात के कारण बेहद परेशान चल रहे हैं। कारण भी जान लीजिए। दरअसल दोनों गांवों के नीचे भूस्खलन होने के कारण 25 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी झील बन गई है जो कि कई हादसों को आमंत्रण दे रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यह झील खतरे को निमंत्रण दे रही है और भविष्य में बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को इसकी सूचना दे दी है। बता दें कि गड़कोट और अंगोठ गांव बिल्कुल आमने-सामने हैं और इन दोनों गांव की तलहटी से गडनी गदेरा बहता है। हाल ही में बारिश के कारण दोनों गांव के नीचे भारी भूस्खलन हुआ और मिट्टी एवं पत्थर गदेरे के किनारे गिर गए जिस कारण गदेरे का रास्ता बंद हो गया है और गदेरे में एक गहरी और चौड़ी झील बन गई है। गांव के लोगों का कहना है कि गांव के नीचे अभी भी जलस्तर बहुत बढ़ रहा है और इस कारण लोगों के मकानों में भी दरारे आ रही हैं। इसी गदेरे में पानी भरने के कारण 1992 में भी बाढ़ आई थी और भरा पूरा बाजार देखते ही देखते उजड़ गया था जिसमें 14 लोगों की दर्दनाक मृत्यु हुई थी। हर वर्ष मानसून के समय यह गदेरा विकराल रूप धर लेता है जिस कारण दोनों ओर ग्रामीणों की सांसे अटक जाती हैं.
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ग्रामीण धीरेंद्र सिंह का कहना है कि इसकी सूचना प्रशासन को दे दी गई है और इस झील को तत्काल प्रभाव से खोलने की जरूरत है। अगर यह समय से नहीं खुलती है तो दोनों गांवों में भारी तबाही मच सकती है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी भूस्खलन रोकने के लिए लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी मगर प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। अगर प्रशासन ने अब लापरवाही बरती तो दोनों गांवों समेत बाजारों को भी बाढ़ जैसे हालात से गुजरना पड़ सकता है। बता दें कि भूस्खलन से ग्रामीण भयभीत हो रखे हैं और रात को डर के मारे सो नहीं पा रहे हैं। तहसीलदार सुरेंद्र सिंह देव ने कहा है कि ग्रामीणों की ओर से दोनों गांव के नीचे भूस्खलन होने के कारण झील बनने की सूचना प्रशासन को मिल गई है। आज झील का जायजा लेने के लिए टीम भेजी जाएगी।