ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे: पहाड़ों पर जल्द दौड़ने लगेगी ट्रेन, सीएम धामी ने की तस्वीरें साझा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना की एक अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर परियोजना की नवीनतम तस्वीरें पोस्ट में की हैं.....
Aug 1 2025 9:32PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का कार्य तेजी से प्रगति कर रहा है, अब जल्द ही पहाड़ों पर भी ट्रेन दौड़ने लगेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना की एक अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर परियोजना की नवीनतम तस्वीरें पोस्ट में की हैं।
CM Dham posted Rishikesh-Karnprayag Railway latest photos
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना तेजी से प्रगति कर रही है। जल्द ही पहाड़ों में ट्रेन दौड़ते हुए देखने का सपना पूरा हो जाएगा। सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस रेलवे परियोजना की नवीनतम तस्वीरें पोस्ट की हैं। इस परियोजना का 2026 तक पूरा हो जाने का अनुमान है।
25.20 किलोमीटर लंबी रेल लाइन
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सीएम धामी ने सोशल मिडिया पोस्ट पर लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में 125.20 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का निर्माण आधुनिक मशीनों की सहायता से तेजी से किया जा रहा है।
पांच जिलों को जोड़ेगी ये परियोजना
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इस रेलवे लाइन पर 12 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाना है, इसके अलावा यह परियोजना पांच जिलों को एक साथ जोड़ेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना का अधिकांश भाग सुरंगों में विकसित किया गया है। ताकि उत्तराखंड के पहाड़ों में एक ऑल-वेदर परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा।
स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में 105 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य सुरंग और 98 किलोमीटर लंबी 12 एस्केप सुरंग का निर्माण शामिल है। इस रेल लाइन के निर्माण से पर्यटन को नए आयाम मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आर्थिकी में भी वृद्धि होगी।
चारधाम और चीन सीमा तक पहुंचने में होगी आसानी
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इस रेलवे लाइन का फायदा देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली जिले को मिलेगा। इस रेललाइन के निर्माण से यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर 2 घंटे रहेगी और चारधाम और चीन सीमा तक पहुंचने में भी आसानी होगी।