image: Supreme Court imposed fine of Rs 2 lakh on Uttarakhand Election Commission

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग पर सुप्रीम कोर्ट का 2 लाख का जुर्माना, आदेश की अनदेखी करने पर सख्त

उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले की अनदेखी करने और इसे चुनौती देने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड निर्वाचन आयोग पर 2 लाख का जुर्माना लगाया है।
Sep 27 2025 6:55PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग की याचिका को खारिज करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि जब कानून में एक से अधिक मतदाता सूची में नाम दर्ज करने पर स्पष्ट रोक है, तो आयोग का स्पष्टीकरण धारा 9 की उपधारा (6) और (7) के विपरीत है।

Supreme Court imposed fine of Rs 2 lakh on Uttarakhand Election Commission

उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि यदि किसी उम्मीदवार का नाम एक से अधिक ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों में दर्ज हो, तो सिर्फ इस आधार पर उसका नामांकन रद्द नहीं किया जाएगा। लेकिन जुलाई 2024 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण पर रोक लगाते हुए टिप्पणी की थी कि यह व्यवस्था उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के खिलाफ है। नैनीताल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह एक वैधानिक प्रतिबंध है और निर्वाचन आयोग का स्पष्टीकरण संबंधित धाराओं के खिलाफ है। आयोग ने तर्क दिया था कि कई मामलों में प्रत्याशियों के नाम अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज पाए जाते हैं, फिर भी उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति मिलती रही है।

असंवैधानिक और अवैध है आयोग का स्पष्टीकरण

नैनीताल हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि निर्वाचन आयोग संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कैसे कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि जब कानून में ऐसी स्थिति पर रोक निर्धारित है, तो आयोग का स्पष्टीकरण असंवैधानिक और अवैध है।

दो मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए नाम दर्ज

कानून की धारा 9 की उप-धारा (6) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक से अधिक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में, या एक ही क्षेत्र की सूची में एक से अधिक बार पंजीकृत नहीं हो सकता है। वहीं, उप-धारा (7) में यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत या छावनी बोर्ड की मतदाता सूची में दर्ज है, तो वह किसी अन्य प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में तभी शामिल हो सकता है जब यह साबित कर दे कि उसका नाम पूर्व सूची से हटा दिया गया है।

निर्वाचन आयोग पर 2 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड निर्वाचन आयोग की दलील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि जब कानून स्पष्ट रूप से रोक लगाता है, तो ऐसा संभव नहीं है। सप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज करते हुए साफ़ तौर पर कहा कि किसी उम्मीदवार का नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज होने पर उसे चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हाईकोर्ट के फैसले की अनदेखी करने और इसे चुनौती देने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड निर्वाचन आयोग पर 2 लाख का जुर्माना भी लगाया है।


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