image: Old woman had to carried 3 km to hospital on shoulder

उत्तरकाशी: कई सालों से अधूरा पड़ा सड़क का काम, बीमार महिला को 3 km कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा अस्पताल

पहाड़ों पर सड़क के नाम पर विकास कहां तक पहुंचा है यह किसी से भी छुपा नहीं है। उत्तराखंड के पहाड़ों में सड़क जैसी मूलभूत जरूरत के अभाव के चलते लोगों को समय पर ठीक इलाज और उपचार नहीं मिल पाता है।
Oct 15 2025 4:33PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ विकासखंड के गमरी–उल्लण मोटर मार्ग पर मंगलवार को एक बार फिर पहाड़ की पुरानी और दर्दनाक हकीकत सामने आई। अधूरे सड़क निर्माण कार्य के कारण ग्रामीणों को 80 वर्षीय बीमार महिला को डंडी-कंडी पर बिठाकर तीन किलोमीटर पैदल सफर तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ा।

Old woman had to carried 3 km to hospital on shoulders

ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार सुबह गमरी गांव की एक 80 वर्षीय वृद्ध महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई। गांव तक कोई वाहन मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों द्वारा लकड़ी और कपड़ों से अस्थायी डंडी-कंडी तैयार की गई। महिला को उस पर बैठाकर लोगों ने कठिन पहाड़ी रास्तों से होते हुए करीब तीन किलोमीटर पैदल यात्रा की और फिर सड़क तक पहुंचाकर वाहन से अस्पताल रवाना किया।

सालों पहले की गई थी सड़क की कटिंग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना कोई नई नहीं है। गांव में सड़क निर्माण अधूरा छोड़े जाने के कारण बीते कई वर्षों से बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इसी तरह डंडी-कंडी पर लादकर अस्पताल पहुंचाया जाता रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गमरी से उल्लण तक करीब चार किलोमीटर सड़क की कटिंग लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सालों पहले कर दी थी, लेकिन उसके बाद से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। अब सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

सरकार दावे करती है काम नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी सड़क को पूरा कराने के लिए वे कई बार आंदोलन कर चुके हैं, कई अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अब तक किसी ने ठोस कदम नहीं उठाया। सरकारें बदलीं, अफसर बदले, लेकिन पहाड़ के लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। अधूरे विकास कार्यों की यह तस्वीर एक बार फिर सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गांववासियों का कहना है, “हर सरकार सड़कों के विकास के दावे करती है, लेकिन हमारे गांव तक सड़क आज भी सपना ही है। अगर इस तरह किसी मरीज की जान चली जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”


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