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उत्तराखंड: गंगा में बहता मिला था युवती का शव, पुलिस सालों बाद भी नहीं सुलझा सकी हत्या का रहस्य

पुलिस ने कट्टा खोला तो उसमें से 20 से 25 वर्ष की एक युवती का शव बरामद हुआ। शव के हाथ-पैर रस्सी से बंधे थे और गले पर दबाव के स्पष्ट निशान थे। शरीर पर गंभीर चोटों के कारण यह साफ हो गया कि यह हत्या का मामला है।
Oct 27 2025 11:19AM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

बहादराबाद थाना क्षेत्र में दो साल से अधिक समय पहले मिली एक युवती की लाश का रहस्य आज तक नहीं खुल पाया है। इस मामले के 868 दिन बाद भी न मृतका की पहचान हो पाई है और न ही हत्यारों का कोई सुराग मिल पाया। आखिरकार पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस की फाइल पर फाइनल रिपोर्ट (एफआर) दर्ज कर इसे बंद कर दिया है।

dead body was not identified even after 868 days

जानकारी के अनुसार 10 जून 2023 की सुबह एक भैंसा-बुग्गी चालक ने हरिद्वार में पतंजलि फूड पार्क से पहले पुल के नीचे नदी में बहते प्लास्टिक के कट्टे को देखा, जिसमें से इंसान के पैर बाहर दिखाई दे रहे थे। उसने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब कट्टा खोला तो उसमें से 20 से 25 वर्ष की एक युवती का शव बरामद हुआ। शव के हाथ-पैर रस्सी से बंधे थे और गले पर दबाव के स्पष्ट निशान थे। शरीर पर गंभीर चोटों के कारण यह साफ हो गया कि यह हत्या का मामला है।

लगातार प्रयास के बाद भी नहीं हुई शिनाख्त

जिसके बाद पुलिस द्वारा अज्ञात हत्यारों के खिलाफमुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। इस मामले की जांच के लिए सीआईयू और स्थानीय पुलिस की कई टीमें गठित की गईं। पुलिस ने हाईवे और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी खंगाले। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब सहित कई राज्यों में भी टीमें भेजी गईं। डीएनए सैंपल सुरक्षित किए गए। लेकिन इसके बावजूद भी युवती के शव की शिनाख्त नहीं हो पाई। पुलिस को शक था कि हत्या किसी अन्य राज्य या क्षेत्र में की गई और सबूत छुपाने के लिए शव को हरिद्वार लाकर नदी में फेंक दिया गया। इस एंगल पर भी जांच की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

फाइनल रिपोर्ट दर्ज कर केस बंद

इस मामले में पुलिस टीम द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद भी कोई सुराग सामने नहीं आ पाया तो, अब पुलिस ने केस को ‘ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री’ घोषित करते हुए फाइनल रिपोर्ट दर्ज कर दी है। यह निर्णय कानून की समय-सीमा और उपलब्ध साक्ष्यों की कमी को ध्यान में रखकर लिया गया है।

केस को किया जा सकता है रिओपन

पुलिस अधिकारी के अनुसार यह केस तकनीकी रूप से बंद जरूर हो गया है, लेकिन यदि भविष्य में कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य या सूचना मिलती है, तो केस को रिओपन किया जाएगा। ऐसे मामले वास्तव में कभी बंद नहीं होते हैं। जब तक हत्यारा पकड़ा न जाए और मृतक की पहचान न हो, तब तक मामला 'खुला' ही माना जाता है। ऐसे मामलों में एफआर लगाना केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, जिससे केस को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।


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