Uttarakhand News: धराली में फूटा आपदा पीड़ितों का गुस्सा! अनिश्चितकालीन धरना शुरू, सड़कों पर ग्रामीण
उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित धराली गांव के ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरने की सूचना मिलते ही एडीएम और एसडीएम मौके पर पहुंचे, जबकि डीएम के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
Jan 26 2026 2:48PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क
गणतंत्र दिवस के मौके पर जहां देशभर में उत्सव का माहौल रहा, वहीं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आपदा प्रभावित धराली गांव के ग्रामीणों का दर्द एक बार फिर सामने आ गया। उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के बाद अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली, जिससे उनके सामने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Protest in Dharali for disaster compensation
धरने के साथ-साथ ग्रामीणों ने जुलूस प्रदर्शन को लेकर काली कमली क्षेत्र में एकत्र होकर आगे की रणनीति भी तैयार की। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह धरना सिर्फ मुआवजे की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक पुनर्वास की लड़ाई है।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और बातचीत के लिए एडीएम और एसडीएम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिलाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी (डीएम) भी जल्द मौके पर पहुंच सकते हैं, ताकि आंदोलनकारियों से सीधे बातचीत कर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके।
मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के बाद कई परिवारों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि-
नुकसान के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए
प्रभावित परिवारों का स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए
गांव में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जाए
ग्रामीणों का आरोप है कि राहत कार्यों में देरी के कारण उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन के सामने चुनौती
धराली गांव का मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ आपदा प्रभावित लोग न्याय और राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन पर दबाव है कि वह तत्काल समाधान निकालकर स्थिति को नियंत्रित करे। फिलहाल अधिकारियों की मौजूदगी के बाद भी ग्रामीण धरने पर डटे हुए हैं और मांगें पूरी होने तक पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।